बवाना अग्निकांड : फैक्ट्री मालिक पर लगीं ये धाराएं..
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बवाना औद्योगिक क्षेत्र में पटाखों के गोदाम में आग लगने से 17 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने गोदाम मालिक मनोज जैन (49) को गिरफ्तार कर लिया है।
उसके खिलाफ लापरवाही बरतने, गैरइरादतन हत्या के अलावा रविवार को विस्फोटक एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों का कहना है कि गोदाम के मेन गेट पर ताला लगा था। इसीलिए हादसे के बाद कोई बाहर नहीं निकल पाया।
पुलिस गेट पर ताला लगा होने की पुष्टि नहीं कर रही है। रविवार को 17 मृतकों में से 14 की पहचान हो गई। इनमें से 12 के अंबेडकर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों के हवाले कर दिए गए।
दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल समेत कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने घटनास्थल का दौरा किया। रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त रजनीश गुप्ता ने बताया कि शुरुआत में सामने आ रहा था कि एफ-83 स्थित गोदाम को मनोज जैन व ललित गोयल मिलकर चला रहे थे।
छानबीन के दौरान मनोज ने कहा कि ललित उसका दोस्त है। फैक्टरी और गोदाम से उसका कोई लेना-देना नहीं है। परिवार के साथ गणेशपुरा, त्रिनगर में रहने वाला मनोज बवाना औद्योगिक क्षेत्र में खिलौने की फैक्टरी चलाता था।
नुकसान होने के कारण उसने फैक्टरी बंद कर एक जनवरी 2018 से 25 हजार रुपये महीना किराये पर एफ-83 परिसर लिया था। मनोज ने स्वीकार किया कि उसने गोदाम के लिए किसी भी विभाग से कोई एनओसी नहीं ली थी।
उसका कहना है कि वह पटाखों और होली के रंग की पैकिंग करता था। इसके लिए किसी एनओसी की जरूरत नहीं होती है। वहीं, पुलिस सूत्रों का कहना है कि फैक्टरी मालिक ने प्लास्टिक दाने का लाइसेंस उत्तरी नगर निगम से लिया था।
पुलिस को गोदाम से होली का धमाका और ल्योपर्ड किंग नामक ब्रांड के पटाखों के डिब्बे मिले हैं। रविवार को फिर एफएसएल की टीम घटनास्थल पहुंची और पुलिस के साथ मिलकर चार घंटे तक छानबीन की।
हादसे के शिकार 17 में से 14 लोगों (नौ महिलाएं, पांच पुरुष) की पहचान हो पाई है। इनमें से 12 के शव पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिए गए हैं। अज्ञात शवों में एक बेहद खराब हालत में है।
दो पुरुषों और एक महिला के शव की पहचान नहीं हो पाई है। हादसे के समय चौथी मंजिल से कूदकर जान बचाने वाले रूप प्रकाश सिंह (24) और सुनीता (47) का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। दोनों की हालत खतरे से बाहर है।
जांच अपराध शाखा को सौंपी
रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त रजनीश गुप्ता ने बताया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक के आदेश के बाद बवाना अग्निकांड की जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है। देर शाम अपराध शाखा ने मामले से संबंधित तथ्य जुटाना शुरू कर दिया था।
50-55 मजदूर करते थे काम
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अलग-अलग शिफ्ट में यहां 50 से 55 मजदूर काम करते थे। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी।
लेबर सुपरवाइजर अजीत रंजन (22) ने मजदूरों का इंतजाम किया हुआ था। उसने मनोज के साथ मिलकर सभी मजदूरों की अलग-अलग सैलरी भी तय की हुई थी।
एक समय में 20-25 लोग ही फैैक्टरी में काम करते थे। पुलिस की मानें तो हादसे के समय सुपरवाइजर अजीत रंजन फैक्टरी में ही मौजूद था। आग में झुलसने से उसकी भी मौत हो गई।
बीएसए अस्पताल में हेल्प डेस्क
दिल्ली पुलिस ने मृतकों की पहचान के लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर अस्पताल में एक हेल्प डेस्क बनाई थी। वहां शाहबाद डेयरी थाने के पुलिस अफसरों की तैनाती की गई थी। इनकी मदद से शाम तक 14 शवों की पहचान हुई। हादसे के बाद लापता लोगों के परिजन भी हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकते हैं।