बवाना हादसा : जान बचाने के लिए जहां छिपे वहीं जिंदा जल गए 17 लोग
आग लगने के बाद फैक्टरी में मौजूद लोगों की क्या स्थिति रही होगी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जान बचाने के लिए कुछ लोगों ने सीढ़ी के नीचे छुपने का प्रयास किया, तो कुछ लोग पहली मंजिल पर भाग गए।
एक ने बेसमेंट में घुसकर अपनी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन आग की भयावहता इतनी थी कि जो जहां छुपे थे, वहीं झुलसे हुए मिले। डिप्टी फायर अधिकारी धर्मपाल भारद्वाज ने बताया कि पहली मंजिल पर 11 लोगों के शव मिले।
वहीं दो-तीन लोग सीढ़ी के नीचे झुलसे हुए मिले। एक बेसमेंट और बाकी भूतल पर मिले। आशंका है कि आग भूतल से शुरू हुई। उसके बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल की ओर भागे, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें सोचने का मौका तक नहीं मिला।
फायर अधिकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मेयर और पार्षद मौके पर पहुंचे
आग लगने की जानकारी मिलते ही उत्तरी दिल्ली की मेयर प्रीति अग्रवाल के साथ-साथ आसपास के सभी निगम पार्षद मौके पर पहुंच गए।
वहां पहुंचने के बाद उन लोगों ने हालात का जायजा लिया। फैक्टरी में काम करने वाले लोगों और हादसे में मारे गए लोगों के परिवार वालों को हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।
प्लास्टिक के साथ-साथ बन रहे थे पटाखे
अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि जिस फैक्टरी में आग लगी, वहां प्लास्टिक का काम किया जा रहा था, लेकिन बताया जा रहा है कि यहां पर अवैध रूप से पटाखे भी बनाए जा रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पटाखे की फैक्टरी होने की वजह से ही आग तेजी सेे फैली और लोगों को भागने का मौका नहीं मिला।
कब-कब आगजनी
वर्ष मौत घायल
2016-17 277 1987
2015-16 339 2099
2014-15 291 2068
2013-14 72 2299
2012-13 285 1979