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दिल्ली में शुरू हुआ नो-स्टॉप टोल: अब बिना रुके गुजरेंगी गाड़ियां, बैरियर-लेस एमएलएफएफ सिस्टम लॉन्च

Mon, 11 May 2026 11:48 PM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Mon, 11 May 2026 11:48 PM IST
सार

दिल्ली देश का दूसरा शहर बन गया है, जहां यह हाईटेक बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम शुरू हुआ है। इससे पहले गुजरात के सूरत-भरूच कॉरिडोर पर इस तकनीक को लागू किया गया था। नई प्रणाली में पारंपरिक टोल बूथ और बैरियर नहीं हैं। सड़क के ऊपर लगाए गए हाई-रिजोल्यूशन कैमरे, सेंसर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक वाहन की नंबर प्लेट पढ़ते हैं और फास्टैग से लिंक खाते से स्वत: टोल राशि काट लेते हैं।

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Barrier-less MLFF system launched at Mundka-Bakkarwala toll on UER-2
बैरियर-फ्री (MLFF) टोल सिस्टम (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

राजधानी में हाईवे यात्रा का तरीका अब बदलने जा रहा है। टोल प्लाजा पर लंबी कतार, बैरियर खुलने का इंतजार और गाड़ियों की रेंगती रफ्तार अब धीरे-धीरे खत्म होने वाला है। दिल्ली-एनसीआर में सोमवार को पहली बार बैरियर-लेस मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली शुरू कर दी गई। इससे वाहन बिना रुके सीधे टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे और टोल राशि अपने आप कट जाएगी।

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अर्बन एक्सटेंशन रोड-दो (यूईआर-2) पर मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर इस अत्याधुनिक व्यवस्था का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा, एनएचएआई चेयरमैन संतोष कुमार यादव, दिल्ली के कई सांसद और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही दिल्ली देश का दूसरा शहर बन गया है, जहां यह हाईटेक बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम शुरू हुआ है। इससे पहले गुजरात के सूरत-भरूच कॉरिडोर पर इस तकनीक को लागू किया गया था। नई प्रणाली में पारंपरिक टोल बूथ और बैरियर नहीं हैं। सड़क के ऊपर लगाए गए हाई-रिजोल्यूशन कैमरे, सेंसर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक वाहन की नंबर प्लेट पढ़ते हैं और फास्टैग से लिंक खाते से स्वत: टोल राशि काट लेते हैं। पूरी प्रक्रिया कुछ सेकंड में होती है और वाहन को रुकने की जरूरत नहीं पड़ती।
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अधिकारियों के अनुसार, वाहन 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भी टोल पार कर सकते हैं। एनएचएआई के अनुसार, इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइनें लगभग खत्म हो जाएंगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और वाहनों के बार-बार रुकने-चलने से होने वाला प्रदूषण भी घटेगा। एनएचएआई चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने बताया कि फिलहाल देशभर में 17 टोल प्लाजा इस तकनीक के तहत विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें सितंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है। इसके अलावा दूसरे चरण में 108 से अधिक नए टोल प्लाजा बनाए जाएंगे, जहां पूरी तरह एमएलएफएफ प्रणाली लागू होगी। इनमें दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, तेलंगाना समेत कई राज्यों के राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं।
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तय अवधि के बाद भुगतान करने पर देना पड़ सकता है दोगुना शुल्क
नई व्यवस्था में उन वाहन चालकों के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है जिनका टोल किसी तकनीकी कारण से तुरंत नहीं कट पाता। यदि कोई वाहन बिना भुगतान दर्ज हुए टोल पार कर जाता है तो वाहन मालिक के मोबाइल पर ई-नोटिस भेजा जाएगा। उसके बाद उसे 72 घंटे के भीतर ऑनलाइन माध्यम से भुगतान करने का अवसर मिलेगा। निर्धारित समय में भुगतान करने पर किसी तरह का जुर्माना नहीं लगेगा, लेकिन तय अवधि के बाद भुगतान करने पर दोगुना शुल्क वसूला जा सकता है। एनएचएआई ने विवाद निपटान की व्यवस्था भी तैयार की है। यदि किसी वाहन से गलत कटौती होती है या तकनीकी गड़बड़ी आती है तो उसके समाधान के लिए अलग शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि गलत ट्रांजैक्शन की स्थिति में त्वरित सुधार किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने संकेत दिए कि भविष्य में यह तकनीक केवल टोल वसूली तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन जैसे सीट बेल्ट नहीं पहनना या वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल को भी कैमरों की मदद से रिकॉर्ड किया जा सकेगा।

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