भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: सुधा के लिए सब्जियों की हो रही जांच, मोबाइल-लैपटॉप प्रयोग पर भी बैन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज साउथ एंड अपार्टमेंट, इरोज गार्डन स्थित अपनी घर में पुलिस की कड़ी निगरानी में हैं। उनके घर में तैनात महिला पुलिस की गार्द को बदल-बदलकर लगाया जा रहा है, जबकि फ्लैट के बाहर पीसीआर वैन तैनात है।
घर में दूध-सब्जियों को भी कड़ी जांच के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है। पुलिस सुधा भारद्वाज को फोन व लैपटॉप आदि का इस्तेमाल नहीं करने दे रही है। सुधा भारद्वाज के साथ उनके फ्लैट में रह रही उनकी एक वकील सहयोगी दिन में किसी काम से बाहर गई थीं। बताया जा रहा है कि उनके साथ भी पुलिस मौजूद रही। वहीं बृहस्पतिवार शाम को इनकी गिरफ्तारी के विरोध में इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
सुधा भारद्वाज को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया था। महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें जिला अदालत में पेश कर पुणे ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की मांग की थी, मगर उनके वकीलों द्वारा हाईकोर्ट में लगाई याचिका पर सुधा को घर में ही नजरबंद किया गया है। देश भर में गिरफ्तार किए गए लोगों का मामला बुधवार को जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो सुप्रीम कोर्ट ने सभी लोगों को छह सितंबर तक उनके घर में ही हाउस अरेस्ट रखने के आदेश दिए।
इसके बाद से ही दिल्ली-फरीदाबाद सीमा पर बसे इरोज गार्डन के साउथ एंड अपार्टमेंट में रहने वाली सुधा भारद्वाज के घर में चार महिला पुलिसकर्मियों की गार्द तैनात की गई है। महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी बदल-बदलकर लगाया जा रहा है।
बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा संपर्क
सुधा भारद्वाज के साथ काम करने वाली उनकी एक सहयोगी कृतिका ने बताया कि नजरबंदी के दौरान पुलिस सुधा भारद्वाज को फोन व लैपटॉप आदि का इस्तेमाल नहीं करने दे रही है। उनका संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ है। उनके घर में आ रहे सामान की भी जांच की जा रही है।
इंकलाबी मजदूर केंद्र ने किया प्रदर्शन
देश के अलग-अलग शहरों में सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में बृहस्पतिवार शाम को इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं ने बीके चौक पर प्रदर्शन किया। केंद्र के शहरी सचिव संजय मौर्य ने कहा कि पुणे पुलिस द्वारा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी केंद्र सरकार के इशारे पर की जा रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की खातिर देश में मजदूर, किसान, दलित विरोधी नीतियों को धड़ल्ले से लागू कर रही है। सरकार की इन नीतियों से असहमत लोगों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को बिना शर्त तुरंत रिहा करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सतीश कुमार, वकील शिवकुमार जोशी, वीरेंद्र चौधरी, अतुल कुमार और रामफल सहित कई बुद्धिजीवी प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे थे।