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Delhi Firecracker Ban: पटाखों पर प्रतिबंध कोई नया मुद्दा नहीं, 1961 में भी रखा गया था ऐसा ही प्रस्ताव

Sat, 11 Oct 2025 04:45 PM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 11 Oct 2025 04:45 PM IST
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Ban on firecrackers not a new debate, similar proposal was mooted way back in 1961
Firecrackers - फोटो : Meta AI

दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध का मुद्दा नया नहीं है। आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि साल 1961 में भी पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर चिंता जताई गई थी और उस समय भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया था, हालांकि भारत सरकार की तरफ उसे मंजूरी नहीं मिल पाई थी। यह जानकारी दिल्ली अभिलेखागार विभाग में संरक्षित दस्तावेजों से मिली है। अब छह दशक बाद भी यह बहस जारी है।

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यह प्रस्ताव जनवरी 1961 में डिप्टी गंज कमेटी, जो उस समय सदर बाजार की औद्योगिक मार्केट एसोसिएशन में से एक थी, द्वारा दिल्ली के मुख्य आयुक्त को भेजे गए पत्र से आया था। कमेटी ने इसमें त्योहारों और समारोहों के दौरान बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण की शिकायत की थी।
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मुख्य आयुक्त के कार्यालय से यह पत्र आगे भारत सरकार के वर्क्स, हाउसिंग एंड सप्लाई मंत्रालय को विचार के लिए भेजा गया था। 1961 में जब यह प्रस्ताव आया था तब दिल्ली की आबादी लगभग 26 लाख थी, जो आज की दो करोड़ से अधिक आबादी का केवल एक छोटा हिस्सा थी। फिर भी उस समय ध्वनि प्रदूषण जनता के लिए गंभीर चिंता का विषय था। डिप्टी गंज समिति ने पत्र में लिखा था कि कुछ अत्यधिक तेज आवाज वाले पटाखों से लोगों को खासकर हृदय रोगियों को, तकलीफ होती है।
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समिति ने इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय भी सुझाए, जिनमें उच्च-डेसिबल पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध, रात 10 बजे के बाद आतिशबाजी पर रोक, आतिशबाजी के निर्माण और बिक्री के लिए सख्त लाइसेंसिंग और उल्लंघन के लिए भारी जुर्माना शामिल है।


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों के उत्पादन और बिक्री की अनुमति वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ में इस मुकदमे की सुनवाई हुई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने शीर्ष अदालत से दिवाली, गुरु पर्व और क्रिसमस जैसे अवसरों पर दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति मांगी। दलीलों में कहा गया कि पटाखों के इस्तेमाल के समय को लेकर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।

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