{"_id":"e946a7d607e16a612ddeaa5e47aab515","slug":"ban-continues-on-e-rickshaw-hindi-news-bm","type":"story","status":"publish","title_hn":"ई-रिक्शा चालकों पर 28 अगस्त तक रहेगा बैन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ई-रिक्शा चालकों पर 28 अगस्त तक रहेगा बैन
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Aug 2014 05:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी में अवैध रूप से चल रहे ई-रिक्शा के चालकों को बुधवार को भी हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने अपने आदेश में रिक्शा चालकों पर 28 अगस्त तक बैन जारी रखने का आदेश दिया है। इस तरह ई-रिक्शा
विज्ञापन
चालकों के भविष्य का क्या होगा ये अब 28 अगस्त के बाद ही पता चलेगा।
वहीं याची ने आरोप लगाया कि अदालत के प्रतिबंध के बावजूद सड़को पर ई-रिक्शा चल रही है और पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही। समयाभाव के कारण अदालत ने मामले की सुनवाई अब बृहस्पतिवार को तय की है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई दोपहर बाद तय थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की अधिवक्ता अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद पेश नहीं हो पाई। इसके बाद सुनवाई शाम करीब चार बजे शुरू हुई।
विज्ञापन
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता सुग्रीव दुबे ने अदालत के समक्ष कई फोटो पेश करते हुए आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद सरेआम ई-रिक्शा सड़को पर दोड़ रही है। इसके अलावा उन्होंने परिवहन विभाग द्वारा मार्च माह में दिए विज्ञापन को पेश किया।
उन्होंने विज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि बैटरी से चालित ई-रिक्शा मोटर वाहन अधिनियम में आएंगे। इसक अलावा विज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि तीन माह में पंजीकरण व छह माह में सभी औपचारिकतांए पूरी न करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा बावजूद इसके न तो सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाया न ही ई-रिक्शा चालकों ने। यह सासर नियमों का उल्लंघन है।
वहीं अधिवक्ता पिंकी आंनद ने कहा कि सरकार ने दिशा निर्देश पेश कर दिए है और एमसीडी, पुलिस व परिवहन विभाग के काम तय किए है। इसके अलावा ई-रिक्शा का बीमा करने के अलावा घायल व मृतको के लिए मुआवजा भी तय किया गया है।
वहीं याची ने आरोप लगाया कि अदालत के प्रतिबंध के बावजूद सड़को पर ई-रिक्शा चल रही है और पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही। समयाभाव के कारण अदालत ने मामले की सुनवाई अब बृहस्पतिवार को तय की है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई दोपहर बाद तय थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की अधिवक्ता अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद पेश नहीं हो पाई। इसके बाद सुनवाई शाम करीब चार बजे शुरू हुई।
विज्ञापन
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता सुग्रीव दुबे ने अदालत के समक्ष कई फोटो पेश करते हुए आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद सरेआम ई-रिक्शा सड़को पर दोड़ रही है। इसके अलावा उन्होंने परिवहन विभाग द्वारा मार्च माह में दिए विज्ञापन को पेश किया।
उन्होंने विज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि बैटरी से चालित ई-रिक्शा मोटर वाहन अधिनियम में आएंगे। इसक अलावा विज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि तीन माह में पंजीकरण व छह माह में सभी औपचारिकतांए पूरी न करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा बावजूद इसके न तो सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाया न ही ई-रिक्शा चालकों ने। यह सासर नियमों का उल्लंघन है।
वहीं अधिवक्ता पिंकी आंनद ने कहा कि सरकार ने दिशा निर्देश पेश कर दिए है और एमसीडी, पुलिस व परिवहन विभाग के काम तय किए है। इसके अलावा ई-रिक्शा का बीमा करने के अलावा घायल व मृतको के लिए मुआवजा भी तय किया गया है।