वाशिंगटन पोस्ट से लेकर बीबीसी तक में छाईं जुनैद के मौत की खबरें, डॉन में मिली प्रमुखता
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दिल्ली-मथुरा ईएमयू में बृहस्पतिवार को सीट के लिए पहले झगड़ा होता है फिर मामला 15 वर्षीय मासूम जुनैद की हत्या तक पहुंच जाता है। देखा जाए तो यह एक सामान्य हादसे जैसा ही नजर आता है। मगर अब ऐसा नहीं रहा। इसे हिंदू-मुस्लिम रंग दे दिया गया है। यही कारण है अब यह मुद्दा वैश्विक बन गया है। विदेशी मीडिया में यह सुर्खियां बनने लगा है।
'वाशिंगटन पोस्ट’ से लेकर 'बीबीसी’ व पाकिस्तानी अंग्रेजी अखबार 'डॉन’ इसे प्रमुखता से उठा रहे हैं। विदेशी मीडिया भी इस मामले को हिंदू-मुस्लिम चश्में से देख रहा है। वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि जुनैद ने कुछ समय पहले ही हाजिफ का टाइटल हासिल किया था।
उसने न कभी भी सूट पहना था और न ही मस्जिद में कुरान का पाठ किया था। इस अखबार के मुताबिक यह पहला मौका होता जब वह ऐसा करता। इसके लिए वह खरीददारी करने दिल्ली जाता है जिसके लिए उसने माता-पिता ने उसे 1500 रुपये दिए थे। खरीददारी के बाद जब वह ट्रेन से लौट रहा था तभी मॉब (भीड़) ने उसकी हत्या कर दी।
वाशिंगटन पोस्ट क्या लिखा पढ़ें
वाशिंगटन पोस्ट ने इस बात का भी जिक्र किया है कि जिन लोगों ने जुनैद पर हमला किया था वह लोग यह भी कह रहे थे कि तुम लोग पाकिस्तानी हो, बीफ खाते हो व देशद्रोही हो। अखबार ने यह भी लिखा है कि भारत में इस्लाम दूसरा बड़ा धर्म है। यहां मुस्लिमों की संख्या 14.2 फीसदी है।
पाकिस्तानी अंग्रेजी अखबार डॉन ने लिखा है कि हमला करने वालों ने जुनैद और उसके भाइयों से कह रहे थे कि उन्हें पाकिस्तान चला जाना चाहिए। वहीं, डॉन ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के हेड असद्दुदीन ओवैसी को उस बयान को प्रमुखा दी है जिसमें उन्होंने कहा है कि देश में नफरत का माहौल है। यहां स्लामोफोबिया का सृजन किया जा रहा है। वहीं 'बीबीसी’ ने तो जुनैद की हत्या को हिंदू सैन्यीकरण तक का नाम दे दिया है।
जुनैद मर्डर को लेकर सोशल मीडिया पर जंग...
सोशल मीडिया में जुनैद की हत्या को लेकर तरह की बातें हो रही हैं। कोई इसे काफी पट्टी बांधकर ईद मनाने को लेकर घटना को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है। ट्वीटर पर हैस्टैंडबाईलिंचविक्टिम्स ट्रेंड कर रहा है। इसमें कुछ लोग छोटी की घटना को बड़ी कैसी बना दी गई इसे बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे सांप्रदायिकता का कारण बता रहे हैं। एक वर्ग ऐसा भी है जो लोगों को सलाह दे रहा है कि ऐसी बातें सामाजिक एकता को हानि पहुंचाती हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो यह कह रहे हैं कि लगता है कि मुगल काल का मुसलमानों से बदला लिया जा रहा है।