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Delhi NCR News: संसद मार्ग प्रदर्शन मामले में 17 आरोपियों को जमानत
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हिरासत में पिटाई के आरोप पर पुलिस से रिपोर्ट तलब, कोर्ट ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला स्वीकार्य नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार देर रात संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन करने के मामले में गिरफ्तार 17 प्रदर्शनकारियों को जमानत दे दी। ये सभी गैरकानूनी जमावड़े और सार्वजनिक स्थान को अवरुद्ध करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। ड्यूटी न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने आदेश में कहा कि आरोपी युवा हैं और उनका पूरा करियर अभी सामने है।
प्रदर्शनकारी एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उक्त अधिकारी ने एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में जमावड़ा किया, पुलिसकर्मियों, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल थी, से हाथापाई की और उन्हें ले जा रही बस की खिड़कियां तोड़ दीं।
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अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला गंभीर मामला है और इसे प्रदर्शन की आड़ में अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने माना कि अधिकांश आरोप जमानती हैं और भारतीय न्याय संहिता की धारा 132 के तहत अधिकतम सजा दो वर्ष है। आरोपियों को 15 हजार रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि के एक जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिया गया। साथ ही देश नहीं छोड़ने, अदालत में पेश होने और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त लगाई गई।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
आरोपी धर्मेंद्र और समर्थ सिंह ने हिरासत में पिटाई का आरोप लगाया। अदालत ने उनकी मेडिको-लीगल रिपोर्ट का हवाला देते हुए नई दिल्ली के डीसीपी से रिपोर्ट मांगी और संसद मार्ग थाने के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार देर रात संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन करने के मामले में गिरफ्तार 17 प्रदर्शनकारियों को जमानत दे दी। ये सभी गैरकानूनी जमावड़े और सार्वजनिक स्थान को अवरुद्ध करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। ड्यूटी न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने आदेश में कहा कि आरोपी युवा हैं और उनका पूरा करियर अभी सामने है।
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प्रदर्शनकारी एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उक्त अधिकारी ने एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में जमावड़ा किया, पुलिसकर्मियों, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल थी, से हाथापाई की और उन्हें ले जा रही बस की खिड़कियां तोड़ दीं।
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अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला गंभीर मामला है और इसे प्रदर्शन की आड़ में अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, अदालत ने माना कि अधिकांश आरोप जमानती हैं और भारतीय न्याय संहिता की धारा 132 के तहत अधिकतम सजा दो वर्ष है। आरोपियों को 15 हजार रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि के एक जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिया गया। साथ ही देश नहीं छोड़ने, अदालत में पेश होने और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त लगाई गई।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
आरोपी धर्मेंद्र और समर्थ सिंह ने हिरासत में पिटाई का आरोप लगाया। अदालत ने उनकी मेडिको-लीगल रिपोर्ट का हवाला देते हुए नई दिल्ली के डीसीपी से रिपोर्ट मांगी और संसद मार्ग थाने के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।