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VIDEO: 'बचपन बचाओ आंदोलन' ने दिखाया एक सच

Sat, 11 Oct 2014 03:21 PM IST
Updated Sat, 11 Oct 2014 03:21 PM IST
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bachpan bachao aandolan's campaign against child abuse.

'बचपन बचाओ आंदोलन' के जरिए हजारों बच्चों को नई जिंदगी देने वाले समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद पूरा देश उन्हें बधाई देने में जुटा है। सोशल मीडिया पर लोग उनके इस सम्मान पर खुशी जता रहे हैं।

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1980 में बचपन बचाओ मुहिम के शुरू होने से लेकर अब तक सत्यार्थी ने कई पड़ाव देखे हैं। मानव तस्करी करने वाले गिरोहों से बच्चों को मुक्त कराने में उन्होंने रात-दिन एक कर दिया।
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बाल मजदूरी और बाल यौन अपराध के खिलाफ भी उन्होंने खास मुहिम छेड़ी। सत्यार्थी के अनुसार बाल मज़दूरी महज एक बीमारी नहीं है, बल्कि कई बीमारियों की जड़ है। इसके कारण कई जिंदगियां तबाह होती हैं।
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सत्यार्थी की मुहिम 'बचपन बचाओ आंदोलन' के फेसबुक पेज पर एक ऐसा वीडियो शेयर किया गया है जिस पर एक मासूम बच्ची के साथ हो रहे अत्याचार और जबरदस्ती को दिखाया गया है।

वीडियो देखने के लिए क्लिक करें

bachpan bachao aandolan's campaign against child abuse.

वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे एक नाबालिग मासूम लड़की को देह व्यापार में धकेला जाता है। किस कदर उसके बचपन को तबाह किया जाता है। हर मोह, हर कदम पर उसे किसी की नजरें घूरती हैं।

बाल अपराध और वेश्यावृत्ति का नंगा सच दिखाने वाले इस वीडियो को यू-ट्यूब पर 1.2 मिलियन ये भी ज्यादा बार देखा गया है।


वीडियो में दिखाए गए आंकडों के अनुसार रोजाना कम से कम 40 नाबालिग लड़कियां जबरन वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर की जाती हैं। एनजीओ ने इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जिसके जरिए आप ऐसी घटनाओं को रोकने में उनकी मदद कर सकते हैं।

नोबेल पुरस्कार से नवाजे गए कैलाश सत्यार्थी के मुताबिक, जब वह रास्ते में आते-जाते बच्चों को काम करता देखते तो उन्हें बेचैनी होने लगती थी। तब उन्होने नौकरी छोड़ दी और 1980 में "बचपन बचाओ आंदोलन" की नींव रखी।

क्या है 'बचपन बचाओ आंदोलन'?

bachpan bachao aandolan's campaign against child abuse.

'बचपन बचाओ आंदोलन' आज भारत के 15 प्रदेशों के 200 से अधिक जिलों में सक्रिय है। इसमें लगभग 70000 स्वयंसेवक हैं जो लगातार मासूमों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के लिए कार्यरत हैं।

एक आकलन के अनुसार, वर्ष 2013 में मानव तस्करी के 1199 मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से 10 फीसदी मामले 'बचपन बचाओ आंदोलन'के प्रयासों से दर्ज कराए गए थे। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में कैलाश सत्यार्थी के दो साथी शहीद हो चुके हैं।

राजधानी दिल्ली में आशियाना बना चुके कैलाश सत्यार्थी ने न केवल बच्चों को मुक्त कराया बल्कि देश से बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए कड़ा कानून बनाने के लिए भी मांग की। इसके लिए उन्होंने जगह-जगह आंदोलन किए और रैलियां भी निकालीं। 1998 में उन्होंने 103 देशों से गुजरने वाली 'बाल श्रम विरोधी विश्व यात्रा' की अगुवाई भी की।

सत्यार्थी का मानना है कि किसी भी देश में बाल मजदूरी का मुख्य कारण गरीबी, अशिक्षा, सरकारी उदासीनता और क्षेत्रीय असंतुलन है।

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