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3-इडियट की तरह रियल लाइफ में जन्मा बच्चा, नर्सों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में कराई डिलीवरी

Thu, 06 Oct 2016 04:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Thu, 06 Oct 2016 04:51 PM IST
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baby delivery in mobile torch light in civil hospital in gurgaon 

अगर आपने आमिर खान की फिल्म 3-इडियट्स देखी है तो आपको वो सीन याद होगा जिसमें करीना कपूर की बड़ी बहन को लेबर पेन होता है और ठीक डिलीवरी के समय अस्पताल में लाइट चली जाती है। फिर किस तरह से बच्चे की डिलीवरी होती है वो पूरा नजारा चौंका देने वाला था।

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ठीक ऐसा ही नजारा गुड़गांव के सेक्टर-10 स्थित सिविल अस्पताल में भी देखने को मिला जबा नर्सों द्वारा मोबाइल टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी का मामला सामने आया। अस्पताल में लाइट चली जाने और इंवर्टर के जवाब देने के कारण आनन फानन में नर्सों ने यह इंतजाम कराया। हालांकि किसी तरह की कोई अनहोनी नहीं हुई।
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जच्चा-बच्चा अब दोनों स्वस्थ हैं। इस घटना के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप की स्थिति रही। अस्पताल में करीब 11 घंटे बिजली नहीं रही। सुबह तक अस्पताल अंधेरे में रहा। 
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रविवार को अस्पताल में बिजली बाधित रही। रात करीब 10.00 बजे बिजली चली गई। जिसके बाद वहां भर्ती दौलताबाद की एक महिला को प्रसव पीड़ा हुई। उसे रात को ही लेबर रूम में ले जाया गया। रात करीब 12.00 बजे के करीब इंवर्टर ने भी जवाब दे दिया।

कृत्रिम रोशनी में रात बारह बजे कराई डिलीवरी

baby delivery in mobile torch light in civil hospital in gurgaon 

ऐसे में मोमबत्ती की रोशनी में करीब 12.15 मिनट में महिला की प्रसूति कराई गई। बता दें कि अस्पताल के गायनी वार्ड में वैसे तो वैकल्पिक तौर पर इंवर्टर लगाया गया है, लेकिन दो घंटे में डबल बैट्री का इंवर्टर जवाब दे गया और पूरा अस्पताल अंधेरे में रहा।

स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी का ढिंढोरा पीटने और अपने आपको प्रोग्रेसिव स्वास्थ्य मंत्री की इमेज में ढालने वाले अनिल विज सिविल अस्पताल की व्यवस्था की चाकचौबंद व्यवस्था करने का दावा करते हैं, लेकिन बदइंतजामी का आलम है कि अस्पताल में बिजली की माकूल व्यवस्था नहीं है।
 
अस्पताल परिसर में ट्रांसफार्मर लगा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद यहां बिजली गुल होते रहती है। रविवार रात 10.00 बजे से सोमवार सुबह करीब 09.30 बजे तक बिजली नहीं रही। 

सुबह अंधेरे में रहा ओपीडी, मरीज हुए परेशान

baby delivery in mobile torch light in civil hospital in gurgaon 

सोमवार सुबह अस्पताल में जब डॉक्टर पहुंचे तो उन्हें भी अंधेरे का सामना करना पड़ा। सभी ओपीडी कमरे में लाइट नहीं थी। बिजली नहीं होने के कारण अस्पताल में लगी बायोमैट्रिक हाजिरी की मशीन भी काम नहीं कर रही थी।

बिजली व्यवस्था से नाराज डॉक्टरों ने चिकित्सा अधीक्षक से इस बाबत शिकायत की। इसके बाद जाकर जेनरेटर के लिए डीजल मंगाया गया। तब फिर जेनरेटर शुरू कर ओपीडी और अन्य जगहों पर बिजली सप्लाई की गई। 
 
बिजली नहीं होने पर रविवार रात से सोमवार सुबह तक अस्पताल की इमरजेंसी सेवा भी प्रभावित रही। अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड अंधेरे में रहा। वहां भर्ती मरीज अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर काम चल रहे थे। वैसे तो सेक्टर-10 के इस सिविल अस्पताल मेें रविवार रात को कोई इमरजेंसी केस तो नहीं आया, लेकिन अगर आता तो जान पर आफत बन सकती थी। 

पहले भी हो चुकी है घटना

baby delivery in mobile torch light in civil hospital in gurgaon 
अस्पताल में बिजली नहीं होने से मोबाइल टॉर्च में डिलीवरी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह की घटना हो चुकी है। जुलाई 2015 में बिजली नहीं होने के कारण मोमबत्ती की रोशनी में प्रसूति कराई गई थी।

जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था। जिला प्रशासन की ओर से एक जेनरेटर भी उपलब्ध कराया गया था। नवंबर 2015 में भी इस तरह की घटना हो चुकी है। 

इसकी जानकारी मिली थी। बिजली व्यवस्था के बारे में वहां के चिकित्सा अधीक्षक से जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट ली जा रही है। बिजली विभाग को भी पत्र लिखा जाएगा। डॉ. पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन 
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