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Delhi NCR News: महिला सुरक्षा को जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
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कमला नेहरू कॉलेज में महिला सुरक्षा पर संवाद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज में सोमवार को एक सुरक्षित और सशक्त कल की ओर'विषय पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज की छात्राओं समेत शिक्षकों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता रहीं।
लता गुप्ता ने छात्राओं से संवाद करते हुए महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने छात्राओं को उनके अधिकारों, संबंधित कानूनों तथा दिल्ली पुलिस की ऑनलाइन एप आधारित सहायता प्रणालियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर महिलाओं को चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग करना चाहिए।
कार्यक्रम में महिलाओं की सुरक्षा को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखने और परस्पर सहयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्या प्रो. डॉ. पवित्रा भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं को केवल जेंडर आइडेंटिटी के दायरे में सीमित करने के बजाय उन्हें सबसे पहले एक मनुष्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज में सोमवार को एक सुरक्षित और सशक्त कल की ओर'विषय पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज की छात्राओं समेत शिक्षकों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता रहीं।
लता गुप्ता ने छात्राओं से संवाद करते हुए महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने छात्राओं को उनके अधिकारों, संबंधित कानूनों तथा दिल्ली पुलिस की ऑनलाइन एप आधारित सहायता प्रणालियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर महिलाओं को चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग करना चाहिए।
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कार्यक्रम में महिलाओं की सुरक्षा को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखने और परस्पर सहयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्या प्रो. डॉ. पवित्रा भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं को केवल जेंडर आइडेंटिटी के दायरे में सीमित करने के बजाय उन्हें सबसे पहले एक मनुष्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
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