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मरने बाद भी दुनिया देख रही हैं आंखें

Tue, 11 Jul 2017 09:05 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Tue, 11 Jul 2017 09:05 AM IST
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awareness about eye donation is increasing in gurugram
- फोटो : Demo Pic

नेत्रदान का हौंसला कई लोगों की जिंदगी को रंगीन बना रहा है। साइबर सिटी में धीरे-धीरे नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि जिंदगी को अलविदा कह चुके लोगों की आंखें मरने के बाद भी दुनिया की रंगत देख रही हैं।

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फर्क सिर्फ जिस्म का है। इस बात की तस्दीक शहर आई-कलेक्शन का काम कर रही संस्था निर्मया चैरिटेबल ट्रस्ट के आंकडे़ करते हैं। ये शहर का एकलौता अधिकृत नेत्र बैंक है।
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आंकड़ों पर नजर डालें तो, पिछले पांच सालों में नेत्रदान के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों की संख्या में करीब एक हजार गुणा इजाफा हुआ है। जनवरी 2007 में शुरू हुए इस ट्रस्ट के पास पहले साल महज 22 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। संस्था का दावा है कि इसके बाद हर साल रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है। इस वर्ष 25000 से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
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निर्मया चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. टीएन आहूजा कहते हैं कि 2011 से 2017 जून तक 1632 लोगों ने मरणोपरांत बाद नेत्रदान किया है। इनमें से 595 नेत्रहीन लोगों में आंख लगाए जा चुके हैं।

सबसे ज्यादा मेवात में नेत्र लगाए गए है। इसके बाद यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों से लोगों के आवेदन पर लगाए गए हैं। दिल्ली में कई संस्थाए काम कर रही हैं, इसलिए वहां के लोगों को कम जरूरत पड़ती है।


व्यक्ति की इच्छा पर नेत्रदान निर्भर
आहूजा नेत्र अस्पताल के डॉ. एच. आहूजा का कहना है कि नेत्रदान करना व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है। आईबैंक में फॉर्म भर कर रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके लिए एक आईडी जारी की जाती है। व्यक्ति की मौत की सूचना के बाद उसकी आंख को निकालने के लिए टीम जाती है। अगर परिवार की सहमति होती है, तभी वह निकाली जाती है। अन्यथा नहीं। आई बैंक की सुविधा नहीं होने से एम्स दिल्ली भेजी जाती है। जहां जरूरतमंद लोगों को डॉक्टरों की मदद से कॉर्निया लगाई जाती है।

आंकड़ों पर एक नजर
-वर्ष        प्राप्त कॉर्निया      लगाया कॉर्निया
2011           214                  74
2012          268                 82
2013          241                 65
2014         223                 84
2015         224                82
2016         334               151
2017 (जून) 128               57

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