दिल्ली में ऑटोमेटेड ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट ट्रैक शुरू, फेल हो रहे 50 फीसदी आवेदक
दिल्ली परिवहन विभाग ने अपना पहला ऑटोमेटेड ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट ट्रैक शुरू कर दिया है। एक सप्ताह से चालू इस ट्रैक पर अब तक आने वाले आवेदकों में से 50 से 60 फीसदी आवेदक टेस्ट में फेल हो रहे है।
अभी फिलहाल सिर्फ शेख सराय एमएलओ ऑफिस में आने वाले आवेदकों का ही टेस्ट लिया जा रहा है। परिवहन अधिकारी की माने तो जून तक बाकी ऑटोमेटेड ट्रैक भी चालू हो जाएंगे। बताते चले कि दिल्ली में 13 एमएलओ ऑफिस है। सभी के लिए अलग-अलग ऑटोमेटेड ट्रैक बनाया जाएगा। एक ऑटोमेटेड ट्रैक बनाने में एक करोड़ रुपये खर्च हो रहा है।
दिल्ली सरकार ने पहला ऑटोमेटेड ट्रैक सराय काले खां में खोला है। इसमें अलग-अलग जगह कई तरह के सेंसर्स के अलावा ट्रैक पर 50 मीटर की ऊंचाई पर आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है जो कि टेस्ट देने वालों की कमियां पकड़ रहे है।
परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि करीब एक सप्ताह से ट्रैक पर टेस्ट लिया जा रहा है। रोजाना औसतन 120 लोग इसपर टेस्ट दे रहे है जिसमें 50 से 60 फीसद लोग फेल हो रहे है।
परिवहन अधिकारी ने बताया कि फेल होने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है। उनका आवेदन पेंडिग रखा जाएगा। वह चाहे तो एक हफ्ते बाद फिर आकर टेस्ट दे सकते है। अगर वह उसमें पास होते है तो पुराने आवेदन पर ही उन्हें ड राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा। कोई दूसरा टेस्ट ना दे इसके लिए टेस्ट लेने से पहले आवेदकों का बॉयोमैट्रिक पहचान लिया जा रहा है।
चार चरणों के टेस्ट में होंगे पास तभी मिलेगा डीएल
ऑटोमेटेड ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट में पास होने के लिए चार अलग-अलग टेस्ट लिया जाता है। पहले आपको आठ नंबर की तरह बने ट्रैक पर वाहन चलाकर दिखाना होगा।
इसके अलावा आपको अपने वाहन रिवर्स गियर में चलाना होगा। रिवर्स गियर में अंग्रेजी का यस जैसे बने ट्रैक पर वाहन चलाना होगा। इसके अलावा पैरेलल पार्किंग लगाना होगा। चौथे आखिरी चरण में आपको एक चढ़ाई वाले रास्ते (ट्रैक) पर वाहन चलाना होगा।
सेंसर्स इस दौरान आपके ड्राइविंग पर नजर रखेगा। अगर आपने इस दौरान कोई भी गलती की तो ऑटोमैटिक कंप्यूटर आपको फेल कर देगा। इस टेस्ट के चालू होने के बाद रोजाना कुल टेस्ट देने वालों में से आधे से ज्यादा लोग फेल हो रहे है।