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Delhi: दर्शकों ने उठाया ‘बारिश’ और ‘एक कप चाय’ का लुत्फ, भरतमुनि रंग उत्सव मोह रहा मन; आयोजन का आज आखिरी दिन
Thu, 25 Jan 2024 04:43 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Thu, 25 Jan 2024 04:43 AM IST
सार
नाटक ‘एक कप चाय’ में अलग-अलग कहानियों और परिस्थितियों में उलझी एक महिला की यात्रा बयां की। राजेश कुमार ने अपने निर्देशन से महिलाओं के संघर्षों पर कड़ी टिप्पणी की है।
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नाटक एक कप चाय में प्रस्तुति देती कलाकार सुची सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भरतमुनि रंग उत्सव में बुधवार को लोग एलटीजी सभागार में कभी ‘एक कप चाय’ का, तो कभी ‘बारिश’ का लुत्फ उठाते दिखे। यह अनुभव उन्हें मंडी हाऊस में लिटिल थिएचर ग्रुप सभागार में साहित्य कला परिषद की ओर से उत्सव में मिला। आयोजन के तीसरे दिन दर्शकों को 4 नाटक देखने को मिले।
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कार्यक्रम की शुरुआत ‘एक कप चाय’ नाटक से हुई। अलग-अलग कहानियों और परिस्थितियों में उलझी एक महिला की यात्रा बयां की। राजेश कुमार ने अपने निर्देशन से महिलाओं के संघर्षों पर कड़ी टिप्पणी की है। इसमें दिखाया कि कैसे एक महिला अपने जीवन को प्रतिदिन कारावास की तरह झेलती है। इसके बाद निर्मल वर्मा द्वारा लिखित ‘धूप का एक टुकड़ा’ ने दर्शकों का मन बहलाया। निर्देशक पूजा ध्यानी ने मंच पर जटिलताओं को पार करने वाली एक महिला की दिलचस्प कहानी पेश की, जिसमें रिश्तों और आत्म-खोज का एक अद्वितीय दृष्टिकोण पेश किया गया।
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इसी क्रम में, तीसरे नाटक ‘बारिश’ का मंचन हुआ। विजय श्रीवास्तव के निर्देशन में दर्शक 1950 के दशक के भारतीय फैशन और जीवनशैली को मंच पर देख सकें। 22 वर्षीय युवक तनवीर को परवीन से पहली नजर में प्यार हो जाता है। कहानी में रिश्तों में पृष्ठभूमि, जाति व्यवस्था, उम्र और स्टेटस की वजह से आई बाधाएं दिखी। लोगों ने कहानी को भावुक हो अपने जीवन से जोड़ा और तालियां बजाकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन मंटो के नाटक ‘जेबकतरा’ के मंचन के साथ हुआ।
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