अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति सम्मान : सीडीएस अनिल चौहान की सीख- रोल मॉडल बनाएं, खुद के लिए अनुशासन तय करिए
सीडीएस चौहान से मुलाकात के दौरान बच्चों ने उनकी जिंदगी के अलावा अलग-अलग विषयों पर सवाल भी पूछे। इस दौरान बड़ी ही सहजता से वह बच्चों के सवालों के जवाब देते हुए नजर आए।
विस्तार
देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से संचालित अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा के विजेताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा, मैं खुद सामान्य परिवार से हूं। केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की है। उस समय मेरी फीस दो रुपये हुआ करती थी। मेहनत और रणनीति बनाकर लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे तो सफलता कदम चूमेगी। सीडीएस चौहान ने सेना की भविष्य की युद्धशैली से लेकर सभी मुद्दों पर खुलकर बात की। इस दौरान उनकी पत्नी अनुपमा चौहान भी मौजूद रहीं। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा को सराहा। सीडीएस चौहान से मुलाकात के दौरान बच्चों ने उनकी जिंदगी के अलावा अलग-अलग विषयों पर सवाल भी पूछे। इस दौरान बड़ी ही सहजता से वह बच्चों के सवालों के जवाब देते हुए नजर आए।
बच्चों के सवाल, सीडीएस के जवाब
युवावस्था में आपको सबसे अधिक क्या प्रेरित करता था? - आनंद मोहन मिश्रा
मैं खुद सामान्य परिवार से हूं। सेना में मैं अपने परिवार की पहली पीढ़ी हूं। कोलकाता में पढ़ाई के दौरान छावनी क्षेत्र के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ा। यहां पर गोरखा सैनिकों को देखता था, जिसने मुझे प्रेरित किया। यहीं से प्रेरणा मिली और एनडीए में चयनित हो गया। सेना में आने के बाद खुद को रणनीति, प्रबंधन जैसी जरूरतों के लिए तैयार किया। हां, हमेशा सीखते रहो। यह बहुत महत्वपूर्ण है। मैं आज भी सीखता हूं।
जीवन को अनुशासित कैसे बना सकते हैं?- जयप्रकाश मौर्य
खुद के लिए रोल मॉडल जरूर चुनें। इससे स्वत: ही अनुशासन आएगा। मैं आज भी रोज सुबह पांच बजे उठता हूं। यह मेरा अनुशासन है। अगर आप ट्रैफिक लाइट का पालन करते हैं, तो यह भी एक अनुशासन है। खुद के लिए अनुशासन तय करिए, यह जीवन को बेहतर बनाएगा।
अग्निपथ योजना पर आपकी क्या राय है?- प्रिंस मिश्रा
पूर्व सीडीएस बिपिन रावत का एक वीडियो यूट्यूब पर मिल जाएगा। उसे जरूर सुनें। उनका कहना है कि फौज में नौकरी के लिए न आएं। यह देश सेवा है। अग्निपथ योजना समाज को अनुशासित बनाने और बेहतर नागरिक देने के लिए बड़ा कदम है। इसे लेकर बेवजह भ्रांतियां फैलाई गई हैं। कोई भी यह बताए क्या एनसीसी कैडेट या पूर्व सैनिक कभी अपनी ट्रेनिंग का गलत उपयोग करते हुए पाया गया। ये समाज को बेहतर जरूर बनाने का काम कर रहे।
क्या अंदर के दुश्मनों से देश को खतरा है? - चिराग गोस्वामी
बाहरी खतरा देश को एकजुट करता है। देश के अंदर का खतरा खोखला करता है। समाज इससे बंटता है। मेरा मानना है कि दोनों से ही निपटने की जरूरत है।
अमृत काल में देश को मजबूत करने के लिए क्या कर रहे? - अनिरूद्ध शर्मा
युद्धकला तेजी से बदल रही है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भविष्य में युद्ध कैसे लड़े जाएंगे। इससे ही हम भविष्य के युद्ध जीत भी पाएंगे। तीनों सेनाएं मिलकर इस चुनौती को पूरा करें। इसीलिए सीडीएस का पद भी बनाया गया।
कभी-कभी फैसला करना मुश्किल हो जाता है, क्या करें? - सूर्यांश
अच्छा-बुरा तो आसानी से आप चुन सकते हैं। लेकिन, जब अच्छाई में से ही चुनाव करना हो, तब मुश्किल आती है। ऐसे में उसके दूसरे पहलुओं का आकलन करें। सही समय पर सही फैसला ही उचित होता है।
सुरक्षा के कारण कुछ परिवार लड़कियों को बाहर नहीं जाने देते, क्या करें? - प्रीति
पहले भी महिलाओं के साथ अपराध होता था। तब भी महिलाएं बाहर निकलीं और नाम कमाया। लड़कियों को भी खुद को सुरक्षित रखना सीखना होगा। सेना में महिलाओं के लिए बैरियर टूट रहे हैं। उनको अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
कठिन समय में खुद को हारने से कैसे बचाएं? - साक्षी सोनी
कठिन समय सभी की जिंदगी में आता है। इसे ही उतार-चढ़ाव कहते हैं। आशावादी सोच रखें। आने वाला समय अच्छा ही होगा। इसको ध्यान में रखें।