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Delhi NCR News: मधु किश्वर के खिलाफ 17 साल पहले दर्ज हत्या के प्रयास का मामला रद्द
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कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता ने किश्वर की ओर से दर्ज करवाए गए केस के कारण प्रतिशोध में की थी एफआईआर
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षाविद् मधु किश्वर के खिलाफ 17 साल पहले हत्या के प्रयास का दर्ज किया गया मामला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे प्रतिशोध और उनकी शिकायत का काउंटर-ब्लास्ट बताया। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि केवल संज्ञेय अपराध का आरोप होने से आपराधिक प्रक्रिया को गति देना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की बातों को अधिकतम मान्यता देने पर भी, उसी घटना से उत्पन्न मामले में उसकी सजा को देखते हुए, इसे आत्मरक्षा या झड़प ही माना जा सकता है। मधु किश्वर ने जून 2008 में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका दायर की थी। यह एफआईआर 31 दिसंबर 2007 को कोटला मुबारकपुर के सेवा नगर मार्केट में बसोया परिवार के साथ हुए विवाद से संबंधित थी। बसोया परिवार ने आरोप लगाया था कि किश्वर ने अपने ड्राइवर को निर्देश दिया कि वह कार से उन्हें और उनके परिवार को कुचल दे। साथ ही किश्वर और उनके साथियों ने हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाईं।
वहीं, मामले में किश्वर की ओर से वकील ने तर्क दिया कि यह एफआईआर उनकी शिकायत पर बदले की कार्रवाई के लिए की गई थी। किश्वर अपनी मानवाधिकार संस्था 'मानुषी' के लिए शहर में अवैध निर्माणों की तस्वीरें ले रही थीं। वे क्षेत्र में सिविल अनुशासन की निगरानी के लिए अधिकृत थीं। उन्होंने बताया कि बसोया परिवार का बेटा कथित तौर पर एक गिरोह चला रहा था, जिसने क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया था। जब किश्वर और स्वयंसेवक तस्वीरें लेने लगे, तो बसोया परिवार ने झगड़ा शुरू किया और किश्वर व उनके ड्राइवर पर हमला किया। इसी घटना पर किश्वर ने बसोया परिवार के खिलाफ दंगा, आपराधिक धमकी और महिला की लज्जा भंग करने का मामला दर्ज कराया था। ट्रायल कोर्ट ने 2019 में बसोया परिवार को दोषी ठहराया। कोर्ट ने कहा ट्रायल कोर्ट का फैसला स्पष्ट करता है कि बसोया परिवार ने अवैध तौर किश्वर को तस्वीरें लेने से रोका और उन्हें व ड्राइवर शीशपाल को पीटा। दोनों एफआईआर एक ही घटना की हैं। ब्यूरो
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षाविद् मधु किश्वर के खिलाफ 17 साल पहले हत्या के प्रयास का दर्ज किया गया मामला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे प्रतिशोध और उनकी शिकायत का काउंटर-ब्लास्ट बताया। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि केवल संज्ञेय अपराध का आरोप होने से आपराधिक प्रक्रिया को गति देना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की बातों को अधिकतम मान्यता देने पर भी, उसी घटना से उत्पन्न मामले में उसकी सजा को देखते हुए, इसे आत्मरक्षा या झड़प ही माना जा सकता है। मधु किश्वर ने जून 2008 में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका दायर की थी। यह एफआईआर 31 दिसंबर 2007 को कोटला मुबारकपुर के सेवा नगर मार्केट में बसोया परिवार के साथ हुए विवाद से संबंधित थी। बसोया परिवार ने आरोप लगाया था कि किश्वर ने अपने ड्राइवर को निर्देश दिया कि वह कार से उन्हें और उनके परिवार को कुचल दे। साथ ही किश्वर और उनके साथियों ने हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाईं।
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वहीं, मामले में किश्वर की ओर से वकील ने तर्क दिया कि यह एफआईआर उनकी शिकायत पर बदले की कार्रवाई के लिए की गई थी। किश्वर अपनी मानवाधिकार संस्था 'मानुषी' के लिए शहर में अवैध निर्माणों की तस्वीरें ले रही थीं। वे क्षेत्र में सिविल अनुशासन की निगरानी के लिए अधिकृत थीं। उन्होंने बताया कि बसोया परिवार का बेटा कथित तौर पर एक गिरोह चला रहा था, जिसने क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया था। जब किश्वर और स्वयंसेवक तस्वीरें लेने लगे, तो बसोया परिवार ने झगड़ा शुरू किया और किश्वर व उनके ड्राइवर पर हमला किया। इसी घटना पर किश्वर ने बसोया परिवार के खिलाफ दंगा, आपराधिक धमकी और महिला की लज्जा भंग करने का मामला दर्ज कराया था। ट्रायल कोर्ट ने 2019 में बसोया परिवार को दोषी ठहराया। कोर्ट ने कहा ट्रायल कोर्ट का फैसला स्पष्ट करता है कि बसोया परिवार ने अवैध तौर किश्वर को तस्वीरें लेने से रोका और उन्हें व ड्राइवर शीशपाल को पीटा। दोनों एफआईआर एक ही घटना की हैं। ब्यूरो
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