अब ‘AAP’ की ईमानदारी पर ही उठा है सवाल!
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दिल्ली सचिवालय में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर लगी पाबंदी से दिल्ली की सियासत गरमा गई है। आम आदमी पार्टी सरकार के इस फैसले का कांग्रेस व भाजपा ने विरोध किया है। दोनों दलों का आरोप है कि पारदर्शिता की वकालत करने वाले आप नेताओं का फैसला कतई सही नहीं है।
भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि सचिवालय में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर पाबंदी को किसी भी स्तर पर जायज नहीं कहा जा सकता। आप की सरकार का यह फैसला पूरी तरह गलत है। अगर जल्द इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो भाजपा इसका विरोध करेगी।
वहीं, कांग्रेस नेता मतीन अहमद का कहना है कि आप के नेता पहले ईमानदारी व पारदर्शिता की बात करते थे, लेकिन सरकार में आने के बाद सचिवालय में मीडिया पर पाबंदी लगा दी। कांग्रेस की सरकार में ऐसा नहीं था। इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए।
आप पर बरसे जेटली
बिजली सब्सिडी के मुद्दे पर अब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम आदमी पार्टी पर चुटकी ली है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि करदाताओं पर बोझ डाले बिना बिजली सब्सिडी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उन राज्यों में राजनीतिक दल सस्ती बिजली देने का वादा कर रहे हैं जो खुद बाहर से बिजली खरीदते हैं। उनके इस बयान को आम आदमी पार्टी के सस्ती बिजली के चुनावी वादे से जोड़कर देखा जा रहा था।
गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत पर वैश्विक सम्मेलन में बोलते हुए जेटली ने कहा कि सस्ती बिजली उपलब्ध कराने का एक तरीका यह है कि राज्य सरकार सब्सिडी देकर इसे उपलब्ध कराए। लेकिन राज्य आधारित सब्सिडी का सीधा अर्थ यह है कि आपको कुछ लोगों को कुछ फ्री देने के लिए कुछ अन्य लोगों पर कर्जा का अतिरिक्त बोझ डालना होगा।
क्या यह दीर्घकालीन तरीका है? उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार द्वारा की जा रही कोयला खानों की नीलामी आम आदमी के लिए सस्ती बिजली की राह प्रशस्त करेगी। दिल्ली सरकार ने बिजली के दाम 50 फीसद घटाने के लिए वित्त और विद्युत विभाग से प्रस्ताव भेजने के कहा है। सस्ती बिजली दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी का प्रमुख चुनावी वादा था।