फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Atlas plant will start again assure managers in talks

गाजियाबादः फिर शुरू होगा एटलस का प्लांट, वार्ता में प्रबंधकों ने दिया भरोसा 

Sat, 06 Jun 2020 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, गजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 06 Jun 2020 06:19 AM IST
सार

  • कंपनी की सोनीपत प्लांट की जमीन बेचकर शुरू किया सकता है साहिबाबाद कारखाना
  • श्रम उपायुक्त के साथ प्रबंधकों और श्रमिकों के बीच हुई वार्ता 
  • श्रम उपायुक्त ने ले-ऑफ में हाजिरी फैक्टरी आकर लगाने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था करने के दिए निर्देश

विज्ञापन
Atlas plant will start again assure managers in talks
एटलस कंपनी ने कर्मचारियों को ले ऑफ किया - फोटो : सुमित सिसोदिया

विस्तार

एटलस कंपनी के गाजियाबाद प्लांट को बंद करने की अटकलों के बाद मचे सियासी घमासान के बीच कंपनी प्रबंधकों ने इसे शीघ्र शुरू करने का आश्वासन दिया है। शुक्रवार को कंपनी प्रबंधकों और श्रमिकों के साथ श्रम विभाग में उपायुक्त राजेश मिश्रा ने बैठक की। कंपनी प्रबंधकों ने सोनीपत में एटलस की जमीन को बेचकर धन जुटाने के बाद जल्द ही साहिबाबाद साइट-4 का कारखाना शुरू करने की संभावना जताई है। 

विज्ञापन


हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने अभी विक्रय प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि नहीं की है। वहीं, यूनियन ने पहले काम और पूरी सैलरी का मुद्दा रखा। उप श्रमायुक्त ने कर्मियों को रोजाना हाजिरी के लिए बुलाने पर एतराज जताया। उन्होंने सभी को घर पर रहकर ही पूरी सैलरी देने की बात कही है। अब अगली वार्ता 23 जून को होगी। इसमें कंपनी को तमाम मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।  
विज्ञापन


 श्रम विभाग में सुबह करीब साढ़े 11 बजे बैठक के लिए एटलस के सीईओ एनपी सिंह, मैनेजर एचआर विजेंद्र सिंह जौहरी, सीटू नेता जेपी शुक्ला और दिनेश मिश्रा पहुंचे। यूनियन के सचिव महेश कुमार ने कहा कि उन्हें पहले काम और फिर पूरी सैलरी दी जाए। इस पर प्रबंधन ने तर्क दिया कि आर्थिक संकट के कारण कंपनी व कारखाना बंद हुआ है। कच्चा माल खरीदने के लिए पैसा भी नहीं है। धन जुटाने के बाद कंपनी शुरू होगी तो सभी को काम दिया जाएगा। इस बीच उप श्रमायुक्त ने पैसा जुटाने के लिए समयसीमा के बारे में पूछा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पर प्रबंधन का कहना था कि सोनीपत में कंपनी की जमीन बेचकर धन जुटाया जा सकता है। 18 जून तक जमीन बेचने की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। हालांकि इसके लिए अभी अधिकारियों से अनुमति भी लेनी है। उप श्रमायुक्त ने सभी कर्मचारियों को रोजाना हाजिरी के लिए बुलाने पर एतराज उठाते हुए कहा कि कर्मियों को घर पर बैठकर ही पूरी सैलरी दी जाए।

प्रबंधन ने बोर्ड मेंबर व अन्य लोगों से वार्ता के बाद ही स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। यूनियन के सचिव के मुताबिक, करीब पौने घंटे चली इस वार्ता में उप-श्रमायुक्त ने प्रबंधन से कंपनी कब तक चलाने के बारे में पूछा। जिस पर प्रबंधन ने धन जुटाकर जल्द ही साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 में कारखाना चालू करने का आश्वासन दिया। 

जिला प्रशासन ने मांगी कंपनी की बैलेंस शीट

श्रम विभाग के उपायुक्त राजेश मिश्रा का कहना है कि जिला प्रशासन ने मामले पर संज्ञान लिया है। एडीएम प्रशासन ने कंपनी की बैलेंस शीट मांगी है। दोनों पक्षों को वार्ता के लिए बुलाया गया था। कंपनी का सिर्फ उत्पादन रोका गया है, जबकि फैक्ट्री को बंद नहीं किया गया है। श्रमिकों को थोड़े समय के लिए आर्थिक संकट का हवाला देते हुए लिए ले-ऑफ पर कंपनी लेकर आई है। मामले में प्रबंधन द्वारा शीघ्र प्लांट को शुरू कराए जाने का आश्वासन दिया गया है।

सपा ने भी सरकारों को घेरा
एटलस का प्लांट बंद होने के बाद समाजवादी पार्टी के निशाने पर केंद्र और प्रदेश सरकार आ गई है। एमएलसी राकेश यादव ने कहा है कि कोरोना संकट के दौरान जब सरकार मजदूरों और श्रमिकों की बात कर रही है, ऐसे में एटलस बल्क में श्रमिकों को निकालने की तैयारी में है। सरकार से मांग है कि बेरोजगार मजदूरों को समायोजित किया जाए। मसले को गंभीरता से लेकर सैकड़ों मजदूरों का रोजगार छीनने से बचाने का काम सरकार करें, अगर मजदूरों का हक मारा जाता है तो समाजवादी पार्टी आंदोलन करेगी।
 
23 जून को होगी स्थिति साफ
मामले में अगली सुनवाई 23 जून को होगी, जिसमें कंपनी प्रबंधन को अपने से जुड़े तमाम सवाल व कंपनी चलाने के बारे में स्थिति स्पष्ट करेगी। उधर, कर्मचारी यूनियन के लोग भी कंपनी चलाकर रोजगार देने के लिए उच्च अधिकारियों से वार्ता कर रहे हैं।    

कंपनी ने नहीं की अभी पूरी स्थिति स्पष्ट
एटलस के सीईओ एनपी सिंह का कहना है कि वार्ता में ले-ऑफ प्रक्रिया को सही बताया है। क्योंकि कंपनी के पास पैसे नहीं हैं। इसी आर्थिक संकट के कारण कंपनी व कारखाना बंद हुआ है। उन्होंने कहा कि सोनीपत वाली कंपनी से हमारा कोई मतलब नहीं है। हमारा वहां जो लैंड बैंक है, उसे बेचने के लिए एनसीएलटी में रिक्वेस्ट की हुई है। 18 जून को उस पर सुनवाई है। अगर एनसीएलटी से बेचने की प्रक्रिया को अनुमति मिलती है तो उसे पूरा किया जाएगा। बिना अनुमति के अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। उधर, कंपनी के कर्मचारियों ने तीसरे दिन भी ले-ऑफ के तहत कंपनी पहुंचकर अपनी हाजिरी लगाई। इसके ही आधार पर कर्मचारियों को आधी सैलरी मिलेगी।

...लेकिन आर्थिक हालात नहीं सुधरे

एटलस की केवल साइकिल ही मशहूर नहीं हुई, बल्कि एटलस कंपनी ने ऑटो इंडस्ट्री, एक्सरसाइज साइकिल व ई-बाइक बनाकर भी हाथ आजमाया। लेकिन छह साल में तीन बार प्रयोग करने के बाद भी कंपनी को नहीं चलाया जा सका और ऑटो से शुरू हुई कंपनी आज पूरी तरह से बंद है। एटलस के बंद होने से सोनीपत में वर्ष 2003 में सबसे ज्यादा लोगों पर मार पड़ी और यहां एक साल के अंदर ही लगभग आठ हजार लोगों का रोजगार चला गया। 
 
सोनीपत में एटलस साइकिल लिमिटेड की पहली यूनिट शहर में लगाकर साइकिल बनाई जाती थी, जो यहां से देश व विदेश तक पहुंच गई। इसके साथ ही एटलस ने सोनीपत के गांव रसोई में एक नई फैक्टरी 1974 के आसपास लगाई, जिसका उद्घाटन भी उस समय राष्ट्रपति रहे डॉ. फखरुद्दीन ने किया था। इस फैक्टरी को एटलस ऑटो इंडस्ट्रीज के नाम से शुरू किया था, जिसमें एटलस की मोपेड बनाई जाती थी। 

एटलस साइकिल में जहां लगभग 7 हजार कर्मचारी काम करते थे, वहीं मोपेड में लगभग एक हजार कर्मचारी कार्यरत थे। यह मोपेड भी दुनियाभर में खूब छाई और यहां से विदेशों में सप्लाई ज्यादा होने लगी। रसोई की फैक्टरी में 1998 में मोपेड का उत्पादन बंद कर दिया गया और वहां एक्सरसाइज साइकिल बनानी शुरू कर दी गई। उस समय तक भी किसी का रोजगार नहीं छीना गया और एक्सरसाइज साइकिल की विदेश में सप्लाई के कारण कंपनी ठीक चलती रही। 

इन साइकिलों का उत्पादन 2003 के शुरुआत तक हुआ और उसके बाद फैक्टरी में ई-बाइक बनानी शुरू कर दी गई। यह 2003 का साल ही हर किसी के लिए परेशानी लेकर आया था। क्योंकि एटलस ने अपनी कई यूनिट पुणे में शिफ्ट कर दी थी। जिसका सबसे बड़ा कारण बंटवारा व अपना वर्चस्व कायम करना बताया जाता है। 

उसी साल लगभग 8 हजार कर्मचारियों का रोजगार छीन लिया गया और फैक्टरियों में उत्पादन बंद कर दिया गया। सोनीपत की एटलस साइकिल व रसोई की ऑटो फैक्टरी दोनों ही एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट थे और दोनों के बंद होने से प्रदेश के उद्योग को बड़ा झटका लगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed