मनोहर सरकार की उपलब्धियों पर अटाली-सुनपेड़ ने लगाया दाग
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राज्य की मनोहर सरकार अपने एक साल पूरे होने पर बेशक अपनी उपलब्धियों पर पीठ थपथपा रही हो, लेकिन औद्योगिक नगरी में एक साल के भीतर हुईं दो बड़ी घटनाएं अटाली और सुनपेड़ ने दामन को दागदार कर दिया है।
इसकी भरपाई करना पाना सरकार के लिए के मुश्किल होगा। 26 अक्तूबर 2014 को भाजपा की मनोहर सरकार ने प्रदेश की सत्ता संभाली थी।
सरकार गठन के पांच महीने बाद 3 मार्च 2015 को पार्टी के विधायक विपुल गोयल ने सेक्टर-12 टाउन पार्क में 250 फीट ऊंचे पोल पर तिरंगा फहराकर रिकार्ड बनाया था।
फरीदाबाद की गरिमा को वापस लाने का किया था वादा
इसी के ठीक चार महीने बाद 25 जुलाई 15 को तीन घंटे में 2.3 लाख पौधरोपण करके रिकार्ड बनाया था। इन दोनों कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री मनोहर लाल शामिल हुए थे।
उन्होंने अपने संबोधन में बार-बार फरीदाबाद की खोई हुई गरिमा को वापस लाने का दावा किया था। इन दोनों उपलब्धियों की चर्चा देशभर में हुई थी।
25 मई 2015 को दबंगों ने अटाली गांव में एक जाति विशेष के धार्मिक स्थल पर तोड़-फोड़कर उसमें आग लगा दी। करीब सवा सौ परिवारों को महीने भर से ज्यादा समय तक बल्लभगढ़ के थाने में बनाए गए राहत शिविर में समय बिताने पड़े थे।
इन दो घटनाओं ने उपलब्धियों पर पानी फेर दिया
मामले ने तूल पकड़ा तो ओवैशी समेत कई बड़े नेताओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। मामला संसद में उठा। इस घटना को लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे कि 21 अक्तूबर को सुनपेड़ कांड हो गया।
एक घटना अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का था तो दूसरा दलितों पर। दोनों घटनाओं में आगजनी की गई। ये दोनों घटनाएं देश में चर्चा का विषय बन गई है।
सरकार ने एक साल में जो भी उपलब्ध्यां अर्जित कीं, इन दो घटनाओं ने उस पर पानी फेर दिया। सत्तापार्टी के विधायकों और केंद्रीय राज्यमंत्री को इसे संभाल पाना मुश्किल हो रहा है।
सोशल साइट्स पर भी छाया हुआ है मामला
केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर कहते हैं कि अटाली और सुनपेड़ कांड से सरकार की उपलब्धियों का कोई लेना-देना नहीं है। दोनों रंजिशन हुई है। बिहार चुनाव को देखते हुए मीडिया ने सुनपेड़ कांड को बड़ा बना दिया जबकि यह आपसी रंजिश का मामला है। सरकार सबका साथ-सबका विकास के फार्मूले पर काम कर रही है।
सुनपेड़ गांव में दलित के घर में आग लगाकर दो मासूम बच्चों को मार डाले जाने का मामला सोशल साइट्स पर भी छाया हुआ है। लोग अपने -अपने विचार सोशल साइट्स पर साझा कर रहे हैं।
घटना के चार दिन बाद भी मामला शांत नहीं हो पा रहा है। सोशल साइट्स पर भाजपा नेताओं और विपक्षी नेताओं की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। ये लोग मीडिया को भी कोसने से नहीं चूक रहे हैं। ऐसी साइट्स पर किए गए लोगों के पोस्ट को काफी संख्या में लोग लाइक्स भी कर रहे हैं और उनकी पोस्ट का रिप्लाई भी दे रहे हैं।