{"_id":"69ce915568299c78b207f60f","slug":"assembly-takes-strict-action-after-cag-report-on-liquor-policy-seeks-action-report-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-130612-2026-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: शराब नीति पर कैग रिपोर्ट के बाद विधानसभा सख्त, मांगी एक्शन रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: शराब नीति पर कैग रिपोर्ट के बाद विधानसभा सख्त, मांगी एक्शन रिपोर्ट
विज्ञापन
2,026.91 करोड़ के नुकसान का जिक्र, सिस्टम में बड़ी खामियां उजागर
आबकारी मंत्री और वित्त विभाग को पत्र, पीएसी की सिफारिशों पर तय समय में जवाब मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
शराब नीति पर आई कैग रिपोर्ट के बाद अब विधानसभा ने सख्त रुख अपनाया है। लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट को सदन से मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे सिफारिशों पर काम करते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तैयार करें। यह रिपोर्ट 31 दिसंबर 2026 तक की स्थिति के आधार पर बनेगी और हर हाल में 31 जनवरी 2027 तक जमा करनी होगी।
इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आबकारी मंत्री और प्रधान सचिव (वित्त) को पत्र लिखकर कहा है कि सिफारिशों पर समयबद्ध और ठोस कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीएसी की रिपोर्ट सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर असर दिखे। रिपोर्ट में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां सामने आईं हैं। नियमों के पालन, लाइसेंस देने, कीमत तय करने, गुणवत्ता जांच और नीति लागू करने में कमियां पाई गईं। इन गड़बड़ियों के कारण करीब 2,026.91 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान जताया गया है।
सिस्टम में बड़ी खामियां
कैग रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आबकारी आपूर्ति शृंखला सूचना प्रबंधन प्रणाली (आएससीआईएमएस) शराब की बिक्री को सही तरीके से ट्रैक नहीं कर पाई। स्टॉक टेक सोल्ड सिस्टम पर ज्यादा निर्भरता और बिना बारकोड वाले उत्पादों की बड़ी संख्या इसकी बड़ी वजह रही। वहीं, खुफिया जानकारी के लिए बना ईआईबी मॉड्यूल भी लगभग निष्क्रिय रहा। लाइसेंसिंग प्रक्रिया में भी खामियां मिलीं। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज नहीं दिए गए और कुछ इकाइयों को एक से ज्यादा लाइसेंस जारी कर दिए गए। एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (ईडीपी) और एक्स-ब्रुअरी प्राइस (ईबीपी) को लेकर स्पष्ट नियम न होने से मनमाने दाम तय किए गए, जिससे लाइसेंसधारकों को फायदा मिला। रिपोर्ट में कहा गया कि सीमित स्रोत नीति, मांग का सही अनुमान न लग पाना और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण शराब की तस्करी बढ़ी। जब्ती के आंकड़ों का सही इस्तेमाल नहीं हुआ और परमिट के गलत उपयोग पर समय पर कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन
सुधार के लिए पीएसी ने कई सुझाव दिए
इनमें ई-अबकारी पोर्टल लागू करना, मजबूत ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम बनाना, बारकोड स्कैनिंग और जियो-टैगिंग को बेहतर करना और आईटी सिस्टम को मजबूत करना शामिल है। साथ ही लाइसेंस प्रक्रिया को सख्त बनाने, हर तीन महीने में समीक्षा करने और कीमत तय करने के लिए स्पष्ट नियम बनाने की सिफारिश की गई है।
विज्ञापन
आबकारी मंत्री और वित्त विभाग को पत्र, पीएसी की सिफारिशों पर तय समय में जवाब मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
शराब नीति पर आई कैग रिपोर्ट के बाद अब विधानसभा ने सख्त रुख अपनाया है। लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट को सदन से मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे सिफारिशों पर काम करते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तैयार करें। यह रिपोर्ट 31 दिसंबर 2026 तक की स्थिति के आधार पर बनेगी और हर हाल में 31 जनवरी 2027 तक जमा करनी होगी।
इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आबकारी मंत्री और प्रधान सचिव (वित्त) को पत्र लिखकर कहा है कि सिफारिशों पर समयबद्ध और ठोस कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीएसी की रिपोर्ट सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर असर दिखे। रिपोर्ट में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां सामने आईं हैं। नियमों के पालन, लाइसेंस देने, कीमत तय करने, गुणवत्ता जांच और नीति लागू करने में कमियां पाई गईं। इन गड़बड़ियों के कारण करीब 2,026.91 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान जताया गया है।
विज्ञापन
सिस्टम में बड़ी खामियां
कैग रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आबकारी आपूर्ति शृंखला सूचना प्रबंधन प्रणाली (आएससीआईएमएस) शराब की बिक्री को सही तरीके से ट्रैक नहीं कर पाई। स्टॉक टेक सोल्ड सिस्टम पर ज्यादा निर्भरता और बिना बारकोड वाले उत्पादों की बड़ी संख्या इसकी बड़ी वजह रही। वहीं, खुफिया जानकारी के लिए बना ईआईबी मॉड्यूल भी लगभग निष्क्रिय रहा। लाइसेंसिंग प्रक्रिया में भी खामियां मिलीं। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज नहीं दिए गए और कुछ इकाइयों को एक से ज्यादा लाइसेंस जारी कर दिए गए। एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (ईडीपी) और एक्स-ब्रुअरी प्राइस (ईबीपी) को लेकर स्पष्ट नियम न होने से मनमाने दाम तय किए गए, जिससे लाइसेंसधारकों को फायदा मिला। रिपोर्ट में कहा गया कि सीमित स्रोत नीति, मांग का सही अनुमान न लग पाना और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण शराब की तस्करी बढ़ी। जब्ती के आंकड़ों का सही इस्तेमाल नहीं हुआ और परमिट के गलत उपयोग पर समय पर कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन
सुधार के लिए पीएसी ने कई सुझाव दिए
इनमें ई-अबकारी पोर्टल लागू करना, मजबूत ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम बनाना, बारकोड स्कैनिंग और जियो-टैगिंग को बेहतर करना और आईटी सिस्टम को मजबूत करना शामिल है। साथ ही लाइसेंस प्रक्रिया को सख्त बनाने, हर तीन महीने में समीक्षा करने और कीमत तय करने के लिए स्पष्ट नियम बनाने की सिफारिश की गई है।