दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र होगा हंगामेदार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र आज (सोमवार) हंगामेदार रहने की उम्मीद है। आनंद पर्वत में मीनाक्षी की पुलिस में शिकायत के बावजूद हत्या की घटना के बाद अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली कैबिनेट ने महिला सुरक्षा पर चर्चा को विशेष सत्र 28 जुलाई को बुलाए जाने को स्वीकृति दी थी।
27 जुलाई को एपीजे अब्दुल कलाम के निधन की वजह से 28 जुलाई को सत्र 3 अगस्त के लिए स्थगित कर दिया गया था।
विस में आज महिला सुरक्षा पर चर्चा के अलावा 2013 से अब तक महिला सुरक्षा, छेड़छाड़ और पीछा करने की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं किए जाने वाले मामलों की जांच के लिए जांच आयोग के गठन को मंजूरी भी दी जाएगी।
विपक्ष ने भी कई मुददों पर कसी कमर
विशेष सत्र की शुरुआत दोपहर 2 बजे होगी। पहला घंटा नियम 280 के तहत दिल्ली की समस्याओं पर चर्चा से होगी।
फिर महिला एवं बाल विकास मंत्री संदीप कुमार महिला सुरक्षा और इनसे जुड़ी शिकायतों से जुड़े मामलों की जांच के लिए आयोग गठन का प्रस्ताव रखेंगे।
प्रस्ताव पर चर्चा में केन्द्र सरकार और उपराज्यपाल की तरफ दिल्ली के काम में टांग अड़ाने का मुद्दा भी सत्तापक्ष के विधायक उठाएंगे। वहीं भाजपा सदस्य विस सत्र की शुरुआत में ही नियम 107 के तहत ध्यानाकर्षण लाने की तैयारी में हैं।
तीन सदस्य वाले विपक्ष की तरफ से भी सत्ता पक्ष को महिला सुरक्षा, विज्ञापन पर अधिक खर्च, पूर्व मंत्री की तरफ से पत्नी के पीछे कुत्ता छोड़ने पर सवाल पूछने और अरविंद केजरीवाल से जवाब मांगने की तैयारी है।
देर रात तक चल सकती है चर्चा
आम आदमी पार्टी के एक विधायक का कहना है कि महिला सुरक्षा ऐसा मुद्दा है जिस पर ज्यादा से ज्यादा सदस्य बोलना चाहते हैं। ऐसे में अगर सदन की कार्यवाही रात 7-10 बजे तक चली तब भी चलाई जाएगी।
विधायकों की कोशिश है कि न सिर्फ चर्चा महिला सुरक्षा पर हो बल्कि अरविंद केजरीवाल को बहस की चुनौती देने वाले पुलिस आयुक्त को भी आड़े हाथ लिया जाए। पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्यादातर विधायकों को सदन में बात रखने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल का कहना है कि विपक्ष के सदस्यों को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा।
हालांकि वेल में आकर चर्चा में भाग लेने की बजाय कार्यवाही बाधित करने की कोशिश की गई तो कड़ा रुख अपनाया जा सकता है।