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आशादीप फाउंडेशन से एक और किशोर भागा

Thu, 13 Nov 2014 01:24 AM IST
अमर उजाला, साहिबाबाद
अमर उजाला, साहिबाबाद Updated Thu, 13 Nov 2014 01:24 AM IST
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Ashadeep Foundation ran another teenager.

ऑपरेशन स्माइल के तहत पकड़े गए किशोरों का शेल्टर होम से भागने का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। शहीद नगर स्थित आशादीप फाउंडेशन से एक और किशोर भाग निकला है। शेल्टर होम से भागने के तीन दिन बाद बुधवार को थाना साहिबाबाद को मामले की सूचना दी गई।

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गाजियाबाद पुलिस ने 14 वर्षीय अमन निवासी मुरादाबाद को गाजियाबाद के रेलवे स्टेशन से बरामद किया था। वह चार वर्ष से मामा के घर से भागकर हरिद्वार में रह रहा था।
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आठ अक्तूबर को ऑपरेशन स्माइल के तहत उसे पुलिस ने संरक्षण में लिया था। इसके बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के जरिए अमन को आशादीप फाउंडेशन के शेल्टर होम की सुपुर्दगी में दिया गया। ठीक एक महीने बाद गत आठ नवंबर की शाम वह शेल्टर होम की दीवार कूदकर भाग गया।
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फाउंडेशन के डायरेक्टर एचके चेट्टी ने बताया कि अमन को खोजने की कोशिश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। एसएचओ उपेंद्र यादव ने बताया कि अमन की तलाश की जा रही है, इसके साथ ही शेल्टर होम से उसके भागने के कारणों की पड़ताल का निर्देश भी दे दिया गया है।

अमर उजाला से बातचीत में कहा था ‘गंगा किनारे रहना अच्छा लगता है’
अमन के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। वह मुरादाबाद में अपने मामा के घर रहता था। उसने अमर उजाला से बातचीत में बताया था कि मामा का लड़का उसकी पिटाई करता था।

इस कारण वह घर छोड़कर भाग गया था। चार वर्ष से हरिद्वार में ही गंगा के किनारे जीवन काट रहा था। अमन ने बताया था कि उसे गंगा किनारे रहना अच्छा लगता है।

शेल्टर होम के कर्मचारियों ने बताया कि जब से उसे पता चला था कि उसे मामा के घर भेजा जाएगा, वह हरिद्वार जाने देने की जिद करता था।

नहीं लिया सबक
आशादीप फाउंडेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पहले 23 किशोर भागे थे, जिनमें से आठ पुलिस ने बरामद भी कर लिए।

अब अमन भाग गया। जबकि गत पांच नवंबर को सिटी मजिस्ट्रेट ने आशादीप फाउंडेशन का दौरा कर दीवार को ऊंचा करने, खिड़की-दरवाजों की मरम्मत के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में कई पर गाज गिरना तय
सिटी मजिस्ट्रेट कपिल सिंह के अनुसार मामले में अब तक आशादीप फाउंडेशन के निदेशक, सिक्योरिटी गार्ड और वार्डन बयान दर्ज किए जा चुके हैं।

अब उन डाक्टरों के बयान भी दर्ज होंगे, जिन्होंने बरामद बच्चों का मेडिकल किया था। फाउंडेशन से भागने और फिर दोबारा से पकड़ गए बच्चों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

इसके अलावा उन पुलिसकर्मियों के भी बयान दर्ज होंगे, जोकि इन बच्चों को पकड़कर लाए थे। आश्रम में लगे सीसीटीवी फुटेज भी तलब की गई है।

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