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'भाजपामय हुआ राजनिवास, राजनाथ के इशारे पर जंग'

Sun, 07 Sep 2014 01:58 AM IST
Updated Sun, 07 Sep 2014 01:58 AM IST
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arvinder singh lovely attacks on delhi bjp.

कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर असंवैधानिक तरीके से सरकार बनाने की कवायद करने का आरोप लगाया है। यह भी आरोप लगाया है कि राजनिवास यानी उपराज्यपाल कार्यालय भी भाजपाई हो गया है। पार्टी ने यह ऐलान किया है कि इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेगी। रविवार को पार्टी घोंडा विधानसभा से आक्रोश रैली के जरिये इसकी शुरुआत करेगी।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री के इशारे पर राजनिवास काम कर रहा है। भाजपा असंवैधानिक तरीके से सरकार बनाने का प्रयास कर रही है, लेकिन राजनिवास चुप्पी साधे हुए है।
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पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा कि पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद भाजपा अलोकतांत्रिक तरीके से सरकार बनाने की कवायद में लगी है। नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा के पास कोई भी नैतिक फॉर्मूला नहीं है जिससे सरकार बन सके। उन्होंने बहुमत साबित करने का खुलासा करने को कहा है।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर सांप्रदायिक पार्टी की असंवैधानिक तरीके से सरकार नहीं बनने देगी। गुप्त मतदान का कोई प्रावधान नियमों में नहीं है और जानबूझकर गुप्त मतदान की आड़ में मीडिया और दिल्लीवासियों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी दिल्ली में सरकार गठन के लिए दिल्ली को धोखा देने वाली आम आदमी पार्टी को दोबारा समर्थन नहीं देगी।

'सीक्रेट बैलेट' ही है आखिरी रास्ता

arvinder singh lovely attacks on delhi bjp.

दिल्ली में सरकार बनाने के लिए सदन में सभी दलों के विधायक नेता का चुनाव कर सकते हैं। इस तरह का प्रावधान दिल्ली सरकार के एनसीटी (नेशनल कैपिटल टेरिटरी) एक्ट धारा नौ में है। मगर यह कदम उपराज्यपाल के निर्देश के बाद विशेष सत्र बुलाकर ही उठाया जा सकता है।

खास बात यह है कि इसमें गुप्त मतदान भी उपराज्यपाल के निर्देश पर संभव है। देश के किसी भी राज्य में अभी तक दिल्ली विधानसभा की वर्तमान स्थिति के दौरान मुख्यमंत्री नहीं चुना गया है। उत्तर प्रदेश का मामला दिल्ली से उलट था।

राजनीतिक बिंदुओं पर गहरी नजर रखने वाले नेताओं व अधिकारियों के अनुसार दिल्ली जैसी स्थिति में अभी तक देश के किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री का फैसला नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में बहुमत का आंकड़ा प्रस्तुत करने पर सरकार बनवाई जाती रही है। किसी भी दल की ओर से आंकड़ा प्रस्तुत नहीं करने पर विधानसभा को भंग करके चुनाव कराए गए हैं।

दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा ने कहा कि उपराज्यपाल एनसीटी की धारा नौ का फरवरी में उपयोग कर चुके हैं। जब उन्होंने सदन में जन लोकपाल बिल लाने से केजरीवाल सरकार को रोका था। इस धारा का सदन को हर हाल में पालन करना होता है। इसी धारा के तहत 1998 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री का फैसला हो चुका है।

दिल्ली व उत्तर प्रदेश की स्थिति में है अंतर

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दिल्ली व उत्तर प्रदेश की स्थिति में दिन रात का फर्क है। दिल्ली में सरकार बनाने का संकट बना हुआ है। विधानसभा में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है और न ही सरकार अस्तित्व में है। जबकि उत्तर प्रदेश में दो विधायकों के बीच मुख्यमंत्री को लेकर झगड़ा था।

वहां मुख्यमंत्री पद पर आसीन कल्याण सिंह ने न तो त्याग पत्र दिया था और न ही वह सदन में विश्वास मत के दौरान हारे थे। राज्यपाल ने रात के समय कल्याण सिंह को हटा कर जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।

इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य विधानसभा के एक्ट की धारा नौ के तहत सदन को मुख्यमंत्री का फैसला करने का निर्देश दिया था। तब विधायकों ने कल्याण सिंह और जगदंबिका पाल के लिए मतदान किया था। दिल्ली में कांग्रेस व आम आदमी पार्टी सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं। इस कारण यहां मुख्यमंत्री पद को लेकर उत्तर प्रदेश की भांति झगड़ा नहीं है।

कब मतदान का सहारा लेगी भाजपा?

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सदन में नेता चुनने का फैसला भाजपा जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद उठाएगी। एक प्रतिशत भी हार का डर होने की स्थिति में वह मतदान के माध्यम से नेता का चुनाव कराने का जोखिम नहीं लेगी। सदन में हार होने पर उसकी चारों ओर किरकिरी होनी तय है।

इस तरह भाजपा की पहली कोशिश रहेगी कि उपराज्यपाल उसे न्योता देकर सरकार बनवा दे। ऐसा न होने पर वह दूसरी कोशिश करेगी कि उपराज्यपाल के समक्ष बहुमत का आंकड़ा प्रस्तुत करके सरकार बनाए।

सदन में मतदान के दौरान भाजपा की राह कैसे होगी आसान
1. भाजपा के अलावा किसी भी दल का विधायक मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार न हो।
2. या कांग्रेस के कम से कम छह विधायक सदन से वॉकआउट कर दें।
3. या आम आदमी पार्टी के कम से कम छह विधायक सदन में न आएं।

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