पांच विधानसभा क्षेत्रों से केजरीवाल का रोड शो, मुस्लिम बहुल सीटों से बनाई दूरी
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को अपने प्रचार अभियान की शुरुआत द्वारका इलाके से की। इसके बाद उन्होंने पालम, पटपड़गंज, कोंडली व त्रिलोकपुरी विधानसभा क्षेत्र में रोड शो कर लोगों से आप के पक्ष में मतदान करने की अपील की। केजरीवाल करीब पांच घंटे तक खुली जीप में घूमे। पांचों विधानसभा क्षेत्रों में केजरीवाल के साथ आप के स्थानीय उम्मीदवार भी मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने आप को वोट करने की अपील की। हालांकि, द्वारका इलाके में एक जगह पर कुछ लोगों ने केजरीवाल को दूर से काले झंडे दिखाए। लेकिन उन लोगों पर ध्यान दिए बिना केजरीवाल का काफिला आगे निकल गया। ब्यूरो
मुस्लिम बहुल सीटों से केजरीवाल ने बनाई दूरी
चुनाव की बिसात बेशक ओखला विधानसभा सीट अंतर्गत शाहीन बाग के इर्द-गिर्द बिछी हुई है, लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) के स्टार प्रचारक अरविंद केजरीवाल चुनाव के आखिरी चरण में पहुंचने के बाद भी मुस्लिम बहुल सीटों पर प्रचार के लिए नहीं गए हैं। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की मुस्लिम बहुल सभी पांच सीटों से भी दूरी बना रखी है। मौजूदा सियासी माहौल में आप की रणनीति केजरीवाल की छवि मुस्लिम हितैषी बनने से रोकने की है। माना जा रहा है कि सोमवार को एक कार्यक्रम में केजरीवाल का ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आप दिल्ली चुनाव के आखिरी दौर में खड़ी है। केजरीवाल फिलहाल रोड शो व चुनावी सभाओं के जरिये प्रचार अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। चुनाव में सबसे ज्यादा मांग केजरीवाल की सभाओं की है। वह खुद भी ज्यादा से ज्यादा रोड शो करके मतदाताओं से सीधे संवाद करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच केजरीवाल ने अब तक किसी भी मुस्लिम बहुल सीटों पर रोड शो नहीं किया है।
दिलचस्प बात यह है कि केजरीवाल ने इन सीटों से सटी शहरों में प्रचार अभियान चलाया है। मसलन, बदरपुर व जंगपुरा सीट पर रोड शो करने के बावजूद केजरीवाल ओखला विधानसभा क्षेत्र नहीं गए। चांदनी चौक में चुनावी सभा की, पर मटियामहल व बल्लीमारान सीट की तरफ रुख नहीं किया। केजरीवाल बावरपुर व करावल नगर गए, पर सीलमपुर व मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र जाने से परहेज किया।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा जिस तरह से दिल्ली चुनाव में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है, उससे केजरीवाल के मुस्लिम बहुल सीटों पर जाने से आप के लिए सियासी तौर पर घाटे का सौदा हो सकता है। शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन पर केजरीवाल को कठघरे में खड़े कर रही भाजपा की मुहिम को इससे बल मिल सकता है।
हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि उम्मीदवारों की मांग पर केंद्रीय इकाई मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय करती है। कई विधायकों ने अपने दम पर चुनाव जीतने का भरोसा दिया है। ऐसे में केजरीवाल का कार्यक्रम इन विधानसभा क्षेत्रों में नहीं लगा है। जरूरी होने पर केजरीवाल अगले तीन दिनों में जा सकते हैं।
दिल्ली में करीब 12 फीसदी हैं मुस्लिम वोटर
दिल्ली में करीब 12 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। आप ने 70 में से पांच सीट पर बल्लीमारान, सीलमपुर, ओखला, मुस्तफाबाद, और मटिया महल सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। इन सीटों पर 45 से 60 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। आप मानकर चल रही है कि कांग्रेस के कमजोर होने से मुस्लिम मतदाताओं के साथ विकल्प हीनता की स्थिति है। वह आप के सिवा किसी दूसरी पार्टी को वोट देकर भाजपा को जिताने की कोशिश नहीं करेगा।
फैक्ट फाइल
2015: विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय की पहली पसंद आप थी। चार विधायक आप से थे और पार्टी ने एक विधायक को मंत्री भी बनाया। लेकिन 2019 संसदीय चुनाव में पार्टी इस समुदाय के वोटरों को अपने साथ नहीं रख सकी। कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिम मतदाताओं के चले जाने से आप तीसरे स्थान पर खिसक गई थी।