दिल्लीः अब क्या करेंगे अरविंद केजरीवाल?
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दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनावों में मिली अप्रत्याशित जीत के साथ आम आदमी पार्टी ने राजनैतिक पटल पर धमाकेदार एंट्री की। आम आदमी की राजनीति और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का दावा करने वाली इस पार्टी से लोगों ने उम्मीदें भी लगा लीं।
पार्टी ने इन्हीं उम्मीदों के दम पर लोकसभा चुनाव में दो सौ से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारे। लेकिन दिल्ली में पार्टी के कुछ गलत फैसलों और देश भर में चली मोदी लहर के चलते आप के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
इससे सीख लेते हुए पार्टी ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से हटने का फैसला लिया। क्योंकि पार्टी दिल्ली चुनावों पर ध्यान लगाना चाहती थी। इसके लिए पार्टी ने तैयारी भी शुरू कर दी थी। लेकिन अचानक बृहस्पतिवार को एलजी ने राष्ट्रपति को एक चिट्ठी लिखकर आप की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
क्या-क्या की थी तैयारी?
आम आदमी पार्टी दिल्ली में चुनाव कराने के लिए प्रयासरत है। बीते 3 अगस्त को आप ने जंतर-मंतर पर एक रैली आयोजित की थी। उसमें केजरीवाल पूरी तरह चुनावी मोड में दिखे थे। उन्होंने दिल्ली की जनता को चुनाव बाद अपने क्रिया कलाप को लेकर कई वायदे भी कर दिए थे।
तब केजरीवाल का कहना था कि चार महीने बाद आप सरकार आने वाली है। इसलिए लोग अभी से भ्रष्ट अधिकारियों की रिकॉर्डिंग शुरू कर दे। ताकि उन पर कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा दिल्ली के अलग-अलग इलाके में आप ने रैलियां आयोजित करना शुरू कर दिया था।
लेकिन एलीजी के पत्र के बाद दिल्ली में मची हलचल से आप को आचानक सबकुछ टूटते हुए दिखा। इसीलिए केजरीवाल अपने विधायकों संग शनिवार शाम राष्ट्रपति से मिलकर दिल्ली में चुनाव कराने की गुहार लगाएंगे।