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स्टेट इलेक्शन कमीशन से केजरीवाल की मांग, दो महीने टाले जाए MCD चुनाव

Thu, 20 Apr 2017 05:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 20 Apr 2017 05:47 PM IST
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Arvind Kejriwal demanded to postpone MCD election by 1-2 month to delhi state election comission
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल - फोटो : file photo
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली राज्य चुनाव आयोग से एमसीडी चुनाव एक-दो महीने तक टालने की मांग की है। एमसीडी चुनाव में वीवीपीएटी उपकरणों और ईवीएम के इंतजाम में समय लगने की बात करते हुए केजरीवाल ने यह मांग की। हालांकि, राज्य चुनाव आयोग ने केजरीवाल की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
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शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि 2006 के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें खराब हो चुकी हैं, जिन्हें कोई भी बच्चा बड़ी आसानी से हैक कर सकता है। इन खराब हो चुकी ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल 23 अप्रैल को होने वाले एमसीडी चुनावों में किया जा रहा है।
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केजरीवाल ने कहा कि ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर की गई शिकायतों के बाद दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने इस बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त को चिट्ठी लिखने की बात कही है। लेकिन एमसीडी चुनाव में अब सिर्फ एक हफ्ते बचे हैं। ऐसे में ईवीएम मशीनों को बदलने या वीवीपीएटी मशीनें लाने की संभावना नहीं है। इसलिए उन्होंने चुनाव आयोग से मांग कि है कि एमसीडी चुनाव एक या दो महीने बाद कराए जाए।
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दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने केजरीवाल की मांग को मानने से इनकार करते हुए कहा कि एक बार चुनाव की तारीखें घोषित हो जाने के बाद उसे स्थगित करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, केजरीवाल ने दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट (डीएमसी) का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र के पास अधिकार है कि वह निकायों का कार्यकाल एक साल बढ़ा सकती है।
 

क्या है वीवीपीएटी मशीनें?

Arvind Kejriwal demanded to postpone MCD election by 1-2 month to delhi state election comission
evm - फोटो : अमर उजाला
वोटर वेरीफायड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) बैलेट पेपर रहित वोटिंग प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए वोटर्स को फीडबैक देने का तरीका है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की स्वतंत्र पुष्टि है। यह व्यवस्था मतदाता को इस बात की पुष्टि करने की अनुमति देती है कि उसकी इच्छानुसार मत पड़ा है या नहीं। इसे वोट बदलने या वोटों को नष्ट करने से रोकने के अतिरिक्त उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

वीवीपीएटी के तहत प्रिंटर की तरह का एक उपकरण इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ा होता है। जब वोट डाला जाता है तब इसकी एक पावती रसीद निकलती है इस पावती पर क्रम संख्या, नाम तथा उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह दर्शाया जाता है।

यह उपकरण वोट डाले जाने की पुष्टि करता है तथा इससे मतदाता ब्यौरों की पुष्टि कर सकता है। रसीद एक बार दिखने के बाद ईवीएम से जुड़े कन्टेनर में चली जाती है। दुर्लभतम मामलों में केवल चुनाव अधिकारी को ही इस तक पहुंच हो सकती है।
 
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