नुकसान कुछ नहीं केवल फायदा ही फायदा: सधी रणनीति से बदली आप सरकार, अब विशुद्ध राजनीति करेंगे केजरीवाल
नई सरकार से पार्टी संगठन के साथ सरकार में भी नई ऊर्जा आएगी। आप सरकार को लेकर बीते सालों का सत्ता विरोधी रुझान धुंधला पड़ेगा। पहले भी इस तरह की रणनीति राजनीतिक दलों ने आजमाई है।
विस्तार
आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सधी रणनीति से मुख्यमंत्री बदलने का फैसला किया है। इसमें उनकी कोशिश मौजूदा विवादों के बीच 10 साल के सत्ता विरोधी रुझान को धुंधला करने की है। वहीं, वह खुद को विशुद्ध राजनीतिक मैदान रखेंगे। इस बीच अगर सरकार अच्छा करती है तो तारीफ केजरीवाल की होगी। बुरा होने दोष नई सरकार पर जाएगा।
हर लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं के तीन समूह होते हैं। पहला, सरकार का समर्थक, दूसरा आलोचक और तटस्थ। सत्ता पक्ष और विपक्ष की कोशिश यही रहती है कि वह समर्थकों को तो खुश ही रखे। साथ में तटस्थ मतदाता को भी अपनी तरफ खींचे। इसी मकसद से पार्टियां सियासी बिसात बिछाती हैं। दिल्ली का मौजूदा बदलाव भी इसका अपवाद नहीं है। इसमें हमारा अनुभव है, उसमें मुख्यमंत्री का चेहरा बदलकर आम आदमी पार्टी (आप) ने लीड ले ली है। आतिशी को मुख्यमंत्री बनाने का आप को नुकसान नहीं होगा। इसके उलट संभावना सियासी फायदा होने की है।
नई सरकार से पार्टी संगठन के साथ सरकार में भी नई ऊर्जा आएगी। आप सरकार को लेकर बीते सालों का सत्ता विरोधी रुझान धुंधला पड़ेगा। पहले भी इस तरह की रणनीति राजनीतिक दलों ने आजमाई है। विधायकों व सांसदों तक के टिकट इसी नजरिए से काटे जाते हैं। दूसरी तरफ नई सरकार आप समर्थकों के साथ आम मतदाता भी सरकार से नई उम्मीदें पालेगा। शुरुआती दिनों की कार्यप्रणाली के आधार पर सरकार को लेकर लोगों में अच्छी या बुरी धारणा बनती है। इसमें विपक्ष की कार्यप्रणाली भी अहम है। अगर सधी हुई रणनीति से वह सत्ता पक्ष पर आक्रामक रहता है और सरकार की कार्यप्रणाली में बदलाव भी दिखता तो सत्ता विरोधी रुख का तीखा किया जा सकता है।
विशुद्ध राजनीति करेंगे केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल अब विशुद्ध राजनीति करेंगे। हरियाणा व महाराष्ट्र के साथ दिल्ली चुनाव के प्रचार अभियान के बीच उनको सरकार चलाने की फिक्र नहीं रहेगी। इसमें विपक्ष भी दिल्ली की अनदेखी करने के आरोप नहीं लगा सकेगा। दूसरी तरफ नई सरकार अगर कोई अच्छा काम करेगी तो उसकी श्रेय केजरीवाल का जाएगा। वहीं, कुछ गड़बड़ होने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री आतिशी पर होगी। सियासी तौर पर यह फायदे का सौदा होगा
(दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. चंद्रचूड़ सिंह ने जैसा अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार को बताया)