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सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा: क्या ‘कूड़े के परमाणु बम’ फटने का इंतजार कर रहे हैं
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 07 Mar 2018 09:40 PM IST
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गाजिपुर लैंडफिल
- फोटो : SELF
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कूड़ा प्रबंधन को लेकर दिल्ली सरकार के उदासीन रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पूरी दिल्ली कूड़े के ‘परमाणु बम’ पर बैठी है। शीर्ष अदालत ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या आप बम के फटने का इंतजार कर रहे हैं। यह राजधानी वासियों के साथ घोर अन्याय है। पीठ ने सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई 19 मार्च तक के लिए टाल दी।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कूड़ा प्रबंधन को लेकर दिल्ली सरकार के अब तक के प्रयासों पर नाखुशी जताई। पीठ ने कहा कि सिर्फ बैठकें हो रही हैं। काम नहीं हो रहा। पीठ ने कहा कि बैठक होने के कई दिनों बाद मिनिट्स तैयार की जा रही है। दो वर्ष पहले हुई बैठक में जो बात हुई थी, वही बात आज हो रही है।
पीठ ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि आखिर कूड़ा प्रबंधन को लेकर क्या किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि अगर आप काम नहीं करना चाहते हैं तो आप हमें बता दीजिए।
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पीठ ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि यह राष्ट्रीय मसला है, लेकिन कोई भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। अदालत ने पाया कि दिल्ली को छोड़ कर किसी भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के वकील सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं थे।
इस बात से नाराज पीठ ने दिल्ली के अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दे दिया। हालांकि बाद में पीठ ने यह देखते हुए आदेश वापस ले लिया कि इस मामले में ये प्रदेश पक्षकार नहीं हैं।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कूड़ा प्रबंधन को लेकर दिल्ली सरकार के अब तक के प्रयासों पर नाखुशी जताई। पीठ ने कहा कि सिर्फ बैठकें हो रही हैं। काम नहीं हो रहा। पीठ ने कहा कि बैठक होने के कई दिनों बाद मिनिट्स तैयार की जा रही है। दो वर्ष पहले हुई बैठक में जो बात हुई थी, वही बात आज हो रही है।
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पीठ ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि आखिर कूड़ा प्रबंधन को लेकर क्या किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि अगर आप काम नहीं करना चाहते हैं तो आप हमें बता दीजिए।
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पीठ ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि यह राष्ट्रीय मसला है, लेकिन कोई भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। अदालत ने पाया कि दिल्ली को छोड़ कर किसी भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के वकील सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं थे।
इस बात से नाराज पीठ ने दिल्ली के अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दे दिया। हालांकि बाद में पीठ ने यह देखते हुए आदेश वापस ले लिया कि इस मामले में ये प्रदेश पक्षकार नहीं हैं।