फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Arbitrary overtaking the plight of farmers officers

किसानों की बदहाली पर हावी अफसरों की मनमानी

Mon, 14 Jul 2014 11:26 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Mon, 14 Jul 2014 11:26 PM IST
विज्ञापन
Arbitrary overtaking the plight of farmers officers

मानसून की बेरुखी के साथ ही अफसरों की मनमानी अब किसानों पर भारी पड़ रही है। बारिश न होने से एक ओर जहां फसलें सूख रही हैं, वहीं कृषि क्षेत्र की बिजली सप्लाई में कटौती कर दी गई है।

विज्ञापन


सूखे की सबसे ज्यादा मार फसलों पर पड़ती है। वेस्ट यूपी में फसलों की सिंचाई का मुख्य माध्यम बिजली है। बारिश कम होने या सूखा पड़ने की स्थिति में नलकूपों के सहारे किसान फसलों को जिंदा रख पाते हैं।
विज्ञापन


मानसून आने में देरी होने से वेस्ट यूपी में फसलें सूखनी शुरू हो गई हैं। कई फसलों की बुवाई ही नहीं हो पाई है। ऐसे में खड़ी फसलों को बचाने के लिए किसानों को ज्यादा बिजली सप्लाई की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में सप्लाई बढ़ाने की बजाय कारपोरेशन ने और कम कर दी है। अब किसानों-ग्रामीणों को 16 घंटे के स्थान पर 10 घंटे बिजली देने के आदेश कर दिए हैं।

लचर सिस्टम से भी परेशानी होती है, ऐसे में किसानों को 6-7 घंटे की सप्लाई ही मिल पा रही है। बिजली ने सूखे में और परेशानी खड़ी कर दी है।

अंग्रेजों के जमाने के नियमों से होता है फसलों के नुकसान का आकलन

शासन के सूखाग्रस्त घोषित करने के बाद बिजली सप्लाई और नहरों में जलापूर्ति बढ़ा दी जाएगी। लेकिन सूखाग्रस्त घोषित करने के मानक भी सौ साल पुराने हैं। इनके तहत अगस्त तक बारिश न होने और एक तिहाई फसल नष्ट हो जाने पर सर्वे के आदेश दिए जाएंगे।

सर्वे रिपोर्ट आने के बाद डीएम-कमिश्नर की ओर से शासन को रिपोर्ट जाएगी। इसके बाद मंत्रिमंडल सूखाग्रस्त होने की घोषणा करेगा। इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भजा जाएगा। वहां से पैकेज की घोषणा की जाएगी।

प्राप्त पैकेज के बाद फिर सर्वे किया जाएगा। इसमें फसलों में हुए नुकसान की स्थिति प्रत्येक किसान की अलग-अलग निकाली जाएगी। इसके आधार पर उनके मुआवजे का निर्धारण किया जाएगा।


मुआवजे का निर्धारण भी मनमाने तरीके से किया जाता है। ऐसे में किसानों को 50-100 रुपये प्रति बीघे का मुआवजा मिलता है।

जबकि नुकसान हजारों का होता है। किसानों को मिलने वाला मुआवजा भी कई महीने बाद दिया जाता है। ऐसे में सूखे का आंकलन और मुआवजा किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंचाता है। ऐसे में यदि किसानों को पर्याप्त बिजली दी जाए तो नुकसान को कम किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed