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मेवात की तरक्की के उस नायक का अंत, जिसने यहां की महिलाओं को दिलाई अंतर्राष्ट्रीय पहचान

Thu, 25 Aug 2016 11:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Thu, 25 Aug 2016 11:13 AM IST
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AR kidwai died who contributed all in development of mewat
एआर क‌िदवई

हाईटेक सिटी गुड़गांव से निकलते ही मेवात क्षेत्र उस दौर में सुनसान जंगल की तरह नजर आता था। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि व पेयजल की हालत भी बेहद खराब थी। बदलाव के लिए मेवात की जनता आवाजें बुलंद कर रही थी। किन्तु सुनने वाला कोई नहीं था।

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यहां तक है कि मेवात अलग जिले के लिए भी साल 2004 तक संघर्ष कर रहा था। इसी बीच हरियाणा को नए राज्यपाल के रूप में डॉ. एआर किदवई मिलें। मेवात के पिछडे़पन की दशा देखकर उसी साल अलग जिले के रूप में मेवात का नामांकरण कराया।

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दुख की बात यह है कि आज वह महान शख्स‌ियत हमारे बीच नहीं रही। यह कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. किदवई न केवल मेवात क्षेत्र की तरक्की के नायक थे बल्कि मेवाती महिलाओं की हस्तकला को अंतराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में उनका विशेष योगदान रहा।

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खुद किदवई साहब महिलाओं से बात करते थे

AR kidwai died who contributed all in development of mewat

उन्होंने मेवात विकास अभिकरण (एमडीए) के चैयरमेन के रूप में 7 जुलाई 2004 को पदभार सम्भाला और 27 जुलाई 2009 तक मेवात विकास के लिए प्रयत्नशील रहे। मेवात की जनता बताती है कि राजा हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज, अलआफिया अस्पताल में एएनएम कोर्स, एमडीए द्वारा पैरामेडिकल कोर्स, मैथ सांईस स्कूल मढ़ी, हथीन सहित मेवात के छह ब्लॉकों में कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय, खानपुरघाटी में लड़कियों का स्कूल, दूध की मिनी डेयरियां, खानपुरघाटी में दुध चिलिंग प्लांट, ड्राईविंग स्कूल, रोजका मेव में लड़कियों के लिए प्रोडेक्शन सेंटर, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी व एमडीयू का रीजनल सेंटर सहित मेवाती महिलाओं की गुदड़ी, चेंगेरी, बिजना व अन्य देहाती हस्तकलाओं को अन्तराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाई।
 

उस दौर में किदवई के साथ काम करने वाली मोहमदी बैगम बताती हैं कि मेवात की जनता को इतनी सहुलियतें दिलाई, जिनकी फेरिस्त बड़ी लबी है। खासकर मेवाती महिलाओं की हस्तकला को प्रदर्शित करने के लिए बाजार मुहैया कराए। वहीं तालीम, सेहत, कुटीर उद्योग में सराहनीय योगदान रहा। मेवाती महिला सबीला जंग बताती हैं कि हमारे उत्पाद अन्तराष्ट्रीय सूरजकुंड़ मेले के अलावा प्रगति मैदान सहित विदेशों तक गये।
 

खुद किदवई साहब महिलाओं से बात करते थे। उन्हीं के अनुसार उन्हें रोजगार के मंच तैयार कराते थे। लड़कियों को पढ़ाने वाली उनकी बात आज तक मुझे याद है। शिक्षाविद्ध अब्दुल वाहब व मोहम्मद खालिद मढ़ी बताते हैं कि पूर्व राज्यपाल डॉ. किदवई अपने कार्यकाल के दौरान दर्जनों बार मेवात में आये। खासकर अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं को भी मेवात में शुरू कराया।

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