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Delhi NCR News: एम्स के डॉक्टरों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट में अपील खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एम्स में जातिवादी भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक मामले में पीड़िता की अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति अमित शर्मा की एकल पीठ ने अपने फैसले में साकेत कोर्ट के 7 सितंबर 2024 के आदेश को बरकरार रखा। इस आदेश में आरोपी डॉक्टरों डॉ. विलास समृत (एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ. रितु दुग्गल (प्रोफेसर एंड चीफ) को एससी एसटी एक्ट और आईपीसी की कुछ धाराओं से डिस्चार्ज कर दिया गया था। हालांकि, तीसरे आरोपी पर यौन उत्पीड़न का मुकदमा चलाने का आदेश यथावत रहेगा।
मामला 2020 का है, जब एम्स में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर (पीड़िता, अनुसूचित जाति वर्ग से) ने आरोप लगाया था कि डॉ. विलास समृत ने 16 मार्च 2020 को ओपीडी में उनके साथ जातिवादी टिप्पणियां कीं, जैसे तू एससी की है, अपने लेवल में रह और काली बिल्ली की तरह रास्ता मत काट। पीड़िता ने आरोप लगाया कि डॉ. समृत ने उन्हें शारीरिक रूप से असुविधाजनक तरीके से छुआ और कुर्सी से हिंसक तरीके से हटाया। डॉ. दुग्गल पर आरोप था कि उन्होंने पीड़िता की शिकायतों को नजरअंदाज किया और जातिवादी टिप्पणियां कीं। पीड़िता ने कहा कि इस उत्पीड़न से परेशान होकर उन्होंने 17 अप्रैल 2020 को दवा की ओवरडोज ली। उसके बाद वे अस्पताल में भर्ती हुईं। जांच के दौरान पीड़िता के बयान लिए गए, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता की पहली शिकायत में जातिवादी टिप्पणियों का जिक्र नहीं था। बाद के बयानों में ये आरोप जोड़े गए, लेकिन जांच में कोई स्वतंत्र गवाह या सबूत नहीं मिला। ओपीडी में मौजूद स्टाफ ने पीड़िता के आरोपों का समर्थन नहीं किया।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एम्स में जातिवादी भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक मामले में पीड़िता की अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति अमित शर्मा की एकल पीठ ने अपने फैसले में साकेत कोर्ट के 7 सितंबर 2024 के आदेश को बरकरार रखा। इस आदेश में आरोपी डॉक्टरों डॉ. विलास समृत (एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ. रितु दुग्गल (प्रोफेसर एंड चीफ) को एससी एसटी एक्ट और आईपीसी की कुछ धाराओं से डिस्चार्ज कर दिया गया था। हालांकि, तीसरे आरोपी पर यौन उत्पीड़न का मुकदमा चलाने का आदेश यथावत रहेगा।
मामला 2020 का है, जब एम्स में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर (पीड़िता, अनुसूचित जाति वर्ग से) ने आरोप लगाया था कि डॉ. विलास समृत ने 16 मार्च 2020 को ओपीडी में उनके साथ जातिवादी टिप्पणियां कीं, जैसे तू एससी की है, अपने लेवल में रह और काली बिल्ली की तरह रास्ता मत काट। पीड़िता ने आरोप लगाया कि डॉ. समृत ने उन्हें शारीरिक रूप से असुविधाजनक तरीके से छुआ और कुर्सी से हिंसक तरीके से हटाया। डॉ. दुग्गल पर आरोप था कि उन्होंने पीड़िता की शिकायतों को नजरअंदाज किया और जातिवादी टिप्पणियां कीं। पीड़िता ने कहा कि इस उत्पीड़न से परेशान होकर उन्होंने 17 अप्रैल 2020 को दवा की ओवरडोज ली। उसके बाद वे अस्पताल में भर्ती हुईं। जांच के दौरान पीड़िता के बयान लिए गए, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता की पहली शिकायत में जातिवादी टिप्पणियों का जिक्र नहीं था। बाद के बयानों में ये आरोप जोड़े गए, लेकिन जांच में कोई स्वतंत्र गवाह या सबूत नहीं मिला। ओपीडी में मौजूद स्टाफ ने पीड़िता के आरोपों का समर्थन नहीं किया।
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