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दूसरे सीरो सर्वे में लिए गए 15 हजार सैंपलों में से 12 हजार की रिपोर्ट आई, 29 फीसदी लोगों में मिली एंटीबॉडी
Thu, 20 Aug 2020 02:45 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 20 Aug 2020 02:45 AM IST
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एंटीबॉडी परीक्षण
- फोटो : social media
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राजधानी में दूसरे सीरो सर्वे के तहत लिए गए करीब 15 हजार सैंपलों में से 12 हजार की रिपोर्ट आ गई है। इस आधार पर दिल्ली में लगभग 29 फीसदी लोगों में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडी मिले हैं। 1 से 7 अगस्त तक दिल्ली में हुए दूसरे सिरो सर्वे के नतीजों का प्रारंभिक आंकलन करने के बाद यह जानकारी सामने आई है। हालांकि,पूरे सैंपल की जांच के बाद इस सप्ताह के अंत तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे आंकड़े जारी किए जाएंगे।
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दूसरे सिरो सर्वे के तहत दिल्ली के सभी 11 जिलों से 15,300 लोगों के सैंपल लिए गए थे और इनकी एंटीबॉडी जांच की गई है ताकि यह पता चल सके कि दिल्ली में कितने लोगों में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडी पैदा हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 15 हजार में से 12 हजार लोगों की रिपोर्ट उन्हें मिल गई है और इसके अनुसार दिल्ली में लगभग 29 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिले हैं। सर्वे में शामिल 28.3 फीसदी पुरुषों में एंटीबॉडी मिले हैं, जबकि महिलाओं में यह 32 फीसदी है। यानी, महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा ठीक हुई हैं। सर्वे में सभी आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया गया था।
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सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता का पता चलेगा
विशेषज्ञों का कहना है कि 50 से 70 प्रतिशत लोग संक्रमित होकर ठीक हो जाते हैं तो सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है (हर्ड इम्युनिटी) बन जाती है। सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉक्टर जुगल किशोर बताते हैं कि अगर किसी क्षेत्र में 50 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिलते हैं तो यह खतरा कम कर देने वाला होगा। ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण के मामले कम हो जाएंगे। अगर लगभग हर दूसरे व्यक्ति में एंटीबॉडी होंगे तो कोरोना का प्रसार बहुत कम हो जायेगा।
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डॉक्टर जुगल के मुताबिक, 50 से 60 फीसदी लोगों को तो कोरोना संक्रमण होगा नहीं क्योंकि उनके अंदर वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो चुके होंगे, इससे बची हुई आबादी को कोरोना का खतरा तो होगा, लेकिन आधे लोगों के इम्यून होने की वजह से यह तेजी से नहीं फैलेगा।
एंटीबॉडी कब तक रह सकती हैं
एम्स के प्रोफेसर नवल विक्रम का कहना है कि अभी तक एंटीबॉडी बनने यानी शरीर में कोरोना के खिलाफ कब तक लड़ने की क्षमता विकसित हुई है इस पर कई शोध हुए हैं। इनके मुताबिक 70 से 90 दिनों तक शरीर में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडी बचे हो सकते हैं। उन्होंने एक अन्य शोध के हवाले से कहा कि एंटीबॉडीज 73 दिनों में आधे हो जाते हैं।