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Delhi NCR News: एक माह से एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म, घायल आरएमएल हो रहे रेफर
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-25 अगस्त से डॉ. एनसी जोशी अस्पताल में चस्पा है सूचना, कुत्तों के काटने से घायल लोग हो रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। करोलबाग स्थित दिल्ली सरकार के डॉ. एनसी जोशी मेमोरियल अस्पताल में एक महीने से अधिक समय से एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके चलते कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचने वाले घायलों को दूसरे अस्पतालों में भेजा जा रहा है। ज्यादातर को टीकाकरण के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है।
अस्पताल परिसर में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की सूचना भी चस्पा की गई है। इमरजेंसी के गेट पर दो जगह लगाए गए पोस्टर में कुत्ते के काटने का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है। पोस्टर पर आदेश की तारीख 25 अगस्त दर्ज है। इसके अलावा पंजीकरण काउंटर पर भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने संबंधी सूचना लगाई गई है।
शनिवार को कुत्ते के काटने के बाद एक युवक दोपहर करीब साढ़े 12 बजे देशबंधु गुप्ता मार्ग से टीकाकरण के लिए अस्पताल पहुंचा। हालांकि, वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे वापस भेज दिया गया और आरएमएल अस्पताल में टीकाकरण कराने की सलाह दी गई।
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वैक्सीन की कमी को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। हालांकि, एक अधिकारी ने इतना जरूर स्वीकार किया कि यदि अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने का पोस्टर लगाया गया है तो इसका मतलब है कि फिलहाल वैक्सीन नहीं है।
रोजाना औसतन 1500 से अधिक मामले आते हैं अस्पतालों में
बता दें कि दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में रोजाना औसतन 1500 से अधिक लोग कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचते हैं। अकेले सफदरजंग अस्पताल में प्रतिदिन 700-800 लोग आते हैं। वहीं, अन्य अस्पतालों में रोजाना करीब 100-150 लोग पहुंचते हैं। आरएमएल अस्पताल में भी प्रतिदिन करीब 150-220 लोग टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। करोलबाग स्थित दिल्ली सरकार के डॉ. एनसी जोशी मेमोरियल अस्पताल में एक महीने से अधिक समय से एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके चलते कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचने वाले घायलों को दूसरे अस्पतालों में भेजा जा रहा है। ज्यादातर को टीकाकरण के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है।
अस्पताल परिसर में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की सूचना भी चस्पा की गई है। इमरजेंसी के गेट पर दो जगह लगाए गए पोस्टर में कुत्ते के काटने का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है। पोस्टर पर आदेश की तारीख 25 अगस्त दर्ज है। इसके अलावा पंजीकरण काउंटर पर भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने संबंधी सूचना लगाई गई है।
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शनिवार को कुत्ते के काटने के बाद एक युवक दोपहर करीब साढ़े 12 बजे देशबंधु गुप्ता मार्ग से टीकाकरण के लिए अस्पताल पहुंचा। हालांकि, वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे वापस भेज दिया गया और आरएमएल अस्पताल में टीकाकरण कराने की सलाह दी गई।
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वैक्सीन की कमी को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। हालांकि, एक अधिकारी ने इतना जरूर स्वीकार किया कि यदि अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने का पोस्टर लगाया गया है तो इसका मतलब है कि फिलहाल वैक्सीन नहीं है।
रोजाना औसतन 1500 से अधिक मामले आते हैं अस्पतालों में
बता दें कि दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में रोजाना औसतन 1500 से अधिक लोग कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचते हैं। अकेले सफदरजंग अस्पताल में प्रतिदिन 700-800 लोग आते हैं। वहीं, अन्य अस्पतालों में रोजाना करीब 100-150 लोग पहुंचते हैं। आरएमएल अस्पताल में भी प्रतिदिन करीब 150-220 लोग टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं।