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तंदूर कांड: आरोपी की रिहाई के मुद्दे पर जवाब के लिए सरकार को आखिरी मौका

Fri, 15 Jul 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 15 Jul 2016 10:32 PM IST
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answer on the issue of the release of tandoor kand accuse, last chance for the government

हाईकोर्ट ने तंदूर कांड मामले में दोषी सुशील शर्मा को तिहाड़ जेल से समय से पहले रिहाई के मुद्दे पर जवाब दाखिल न करने पर सरकार के प्रति नाराजगी जताई है। अदालत ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम मौका प्रदान किया है।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार ने अब भी याची सुशील की समय से पहले रिहाई संबंधी आवेदन को खारिज करने का आधार नहीं बताया तो अगली सुनवाई में गृह विभाग के उप सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अदालत ने मामले की सुनवाई 20 सितंबर तय की है।
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अदालत ने इससे पहले भी सरकार को निर्देश दिया था कि शर्मा मामले में उपराज्यपाल द्वारा लिए गए निर्णय को पेश करने का निर्देश दिया था। दिल्ली सरकार ने पहले बताया था कि सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) का निर्णय उपराज्यपाल के अनुमोदन के अधीन है।

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शव के टुकड़े कर चलाए थे तंदूर में

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याची के अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि उपराज्यपाल द्वारा लिए गए निर्णय की जानकारी दिए बिना ही सरकार ने उनके मुवक्किल की पैरोल रद्द कर 12 अप्रैल को जबरन जेल भेज दिया था।

हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष 15 सितंबर को शर्मा को पैरोल प्रदान करते हुए कहा था कि जब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाता वह जेल से बाहर रहेगा। शर्मा ने तर्क रखा था कि वह पिछले 25 वर्षो से जेल में है और तय दिशा निर्देशों के तहत उसे रिहा किया जाना चाहिए।

शर्मा पर अपनी पत्नी नैना साहनी की 2 जुलाई को सनसनीखेज तरीके से हत्या कर उसके शव के टुकड़े कर तंदूर में जलाने के प्रयास करने का आरोप था। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा दी थी और हाईकोर्ट ने सजा को बहाल रखा था। सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील करते हुए कहा था कि उसे 25 वर्ष तक कोई छूट न दी जाए।

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