बाइक बोट की तर्ज पर एक और फर्जीवाड़ा, गो-वे नाम से निवेश कराने वाली कंपनी पर केस दर्ज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाइक बोट की तर्ज पर कासना कोतवाली क्षेत्र में गो-वे (मैसर्स केडीएम एंटरप्राइजेज) नाम की कंपनी के फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। 22 निवेशकों ने रविवार को कासना कोतवाली पहुंचकर शिकायत की। एक निवेशक की तहरीर पर पुलिस ने कंपनी के पदाधिकारी दंपती अनिल सेन व उसकी पत्नी मीनू पर मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। निवेशकों ने बाइक बोट की तर्ज पर ही 62 हजार रुपये निवेश कर एक साल में धन दोगुना करने का झांसा देकर बड़ी संख्या में लोगों से करोड़ों की ठगी का आरोप लगाया है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले ने 8 लाख 68 हजार ठगी का आरोप लगाया है।
बुलंदशहर के चंदेरू नवादा गांव निवासी दीपक शर्मा ने कासना कोतवाली पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि गो-वे कंपनी ने कासना कोतवाली क्षेत्र में साइट-4 में दफ्तर खोला था। कंपनी ने सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से लोगों का धन दो गुना करने का झांसा दिया था। इसके लिए एक आईडी पर कंपनी 42 हजार रुपये का निवेश कराती थी। आरोप है कि बाइक बोट का फर्जीवाड़ा सामने आने पर लोगों को शक होने लगा था। इसके चलते लोग दफ्तर पहुंचकर आरोपियों से रुपये वापस मांगने लगे थे। 15 जून को लोग एकत्रित होकर आरोपियों के दफ्तर पहुंचे, तो उन्होंने सोमवार को सभी का रुपया वापस करने का वादा किया। आरोप है कि इसी रात को आरोपी दफ्तर में ताला लगाकर भाग गए। आरोपियों ने अपने मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिए। रविवार को दफ्तर पर ताला लटका देख निवेशक भड़क गए और कासना कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
- कई लोग गो-वे कंपनी के पदाधिकारियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगा रहे थे। उनकी शिकायत पर कंपनी के पदाधिकारी अनिल सेन व उसकी पत्नी पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
अजय कुमार, कासना कोतवाली प्रभारी
निवेशकों को गुमराह करने के लिए एकत्रित किए थे चेक
बाइक बोट कंपनी के चीती गांव स्थित दफ्तर से शनिवार को बरामद बड़ी संख्या में चेक निवेशकों को गुमराह करने के लिए भेजे जाने वाले थे। बाइक बोट कंपनी ने नवंबर दिसंबर में निवेशकों को भुगतान देना बंद कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने निवेशकों को गुमराह करने के लिए उन्हें पोस्टडेट के चेक देने शुरू कर दिए थे। दफ्तर से बरामद चेक उन्हीं में से है। जिन्हें कई निवेशकों को भेज दिया गया है और कई को भेजना बाकी था। वहीं, यह भी जानकारी मिल रही है कि आरोपियों ने लोकसभा चुनाव के बाद ही दफ्तर बंद करने और सामान ठिकाने लगाने की योजना बना ली थी। आरोपियों ने इसी क्रम में कोट दफ्तर को चीती शिफ्ट करने के बाद आग लगाई थी। वहीं, बड़ी संख्या में बाइक को मेरठ भेजे जाने की भी सूत्रों ने जानकारी दी है।