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Delhi NCR News: चेक बाउंस मामले में महिला को बचाव का एक और मौका
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-यह मामला मंजू देवी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में एक महिला का बचाव पक्ष रखने का अधिकार समाप्त करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए उसे अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई न्याय व्यवस्था की बुनियाद है। किसी आरोपी को केवल एक बार मौका देना पर्याप्त अवसर नहीं माना जा सकता।
यह मामला मंजू देवी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें चेक बाउंस (सुनीता देवी द्वारा एनआई एक्ट के तहत दर्ज) मामले में उनके बचाव साक्ष्य पेश करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायतकर्ता की ओर से मार्च 2025 में साक्ष्य पूरे हो चुके थे। अदालत ने आरोपी को गवाहों की सूची व स्वयं को गवाह पेश करने के लिए 30 जुलाई तक का समय दिया, लेकिन निर्धारित तिथि पर कोई आवेदन नहीं दाखिल किया गया। इस पर मजिस्ट्रेट ने बचाव का अधिकार समाप्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिकार समाप्त करने से न्यायिक प्रक्रिया औपचारिकता मात्र रह जाती है, इसलिए अंतिम मौका देना उचित है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में एक महिला का बचाव पक्ष रखने का अधिकार समाप्त करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए उसे अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई न्याय व्यवस्था की बुनियाद है। किसी आरोपी को केवल एक बार मौका देना पर्याप्त अवसर नहीं माना जा सकता।
यह मामला मंजू देवी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें चेक बाउंस (सुनीता देवी द्वारा एनआई एक्ट के तहत दर्ज) मामले में उनके बचाव साक्ष्य पेश करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया था।
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रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायतकर्ता की ओर से मार्च 2025 में साक्ष्य पूरे हो चुके थे। अदालत ने आरोपी को गवाहों की सूची व स्वयं को गवाह पेश करने के लिए 30 जुलाई तक का समय दिया, लेकिन निर्धारित तिथि पर कोई आवेदन नहीं दाखिल किया गया। इस पर मजिस्ट्रेट ने बचाव का अधिकार समाप्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिकार समाप्त करने से न्यायिक प्रक्रिया औपचारिकता मात्र रह जाती है, इसलिए अंतिम मौका देना उचित है।
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