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अनाज मंडी इलाके में 43 लोगों की मौत का मामला: मजदूरों की चिंता, फैक्टरी बंद होगी तो कैसे भरेंगे पेट
Wed, 11 Dec 2019 10:25 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 11 Dec 2019 10:25 PM IST
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delhi anaj mandi fire
- फोटो : अमर उजाला
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अनाज मंडी इलाके में हुए हादसे के बाद फैक्टरियों पर हुई तालाबंदी ने कई हजार मजदूरों को बेरोजगार कर दिया है। यही वजह है कि अब उन्हें अपनी रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है। बुधवार को अनाज मंडी इलाके में बेरोजगार हुए आक्रोषित मजदूरों ने नारेबाजी की। उनका कहना था कि अब वह अपने परिवार को कैसे पालेंगे।
गांव में परिवार उनकी कमाई पर आश्रित हैं। फैक्टरी मालिकों ने उन्हें समझा कर शांत कराया। कोई भी मजदूर वापस जाने को तैयार नही है। उनका कहना है कि वह दिल्ली में ही रहकर कुछ न कुछ कामधंधा कर पेट पालने की कोशिश करेंगे।
उल्लेखनीय है कि इस इलाके में 25 से 30 हजार मजदूर अलग-अलग फैक्टरियों में काम करते हैं। अचानक फैक्टरियां बंद होने से सभी मजदूर सड़क पर आ गए हैं। मालिकों ने भी मजदूरों से अपने-अपने गांव जाने के लिए कह दिया है। कुछ तो अपने गांव लौट भी गए हैं, लेकिन हजारों मजदूर वापस जाने को तैयार नहीं हैं।
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एक मजदूर असलम ने बताया कि वह 12 साल की उम्र में यहां काम करने आया था। काम सीखने के दौरान उसे बस खाने और रहने को जगह दी गई थी। काम सीखने के बाद उसे पहले तीन हजार दिए जाने लगे। अब मालिक उसे दस हजार रुपये दे रहा है। जिस फैक्टरी में असलम काम करता है, वहां 13 लोग रहते हैं।
असलम बताता है कि सभी का खाना एक ही जगह बन जाता है, कम पैसों में खाने का भी जुगाड़ हो जाता है। वह ज्यादातर पैसे बचाकर अपनी मां के पास गांव में सिवान, बिहार भेज देता है। एक अन्य मजदूर रागिब ने बताया कि मीडिया ने मामले को जबरदस्ती बड़ा किया हुआ है। यदि मीडिया खबरें देना बंद कर दे तो जल्द ही मामला शांत हो जाएगा। इस बात से नाराज मजदूरों ने मीडिया से बदसलूकी भी की।
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गांव में परिवार उनकी कमाई पर आश्रित हैं। फैक्टरी मालिकों ने उन्हें समझा कर शांत कराया। कोई भी मजदूर वापस जाने को तैयार नही है। उनका कहना है कि वह दिल्ली में ही रहकर कुछ न कुछ कामधंधा कर पेट पालने की कोशिश करेंगे।
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उल्लेखनीय है कि इस इलाके में 25 से 30 हजार मजदूर अलग-अलग फैक्टरियों में काम करते हैं। अचानक फैक्टरियां बंद होने से सभी मजदूर सड़क पर आ गए हैं। मालिकों ने भी मजदूरों से अपने-अपने गांव जाने के लिए कह दिया है। कुछ तो अपने गांव लौट भी गए हैं, लेकिन हजारों मजदूर वापस जाने को तैयार नहीं हैं।
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एक मजदूर असलम ने बताया कि वह 12 साल की उम्र में यहां काम करने आया था। काम सीखने के दौरान उसे बस खाने और रहने को जगह दी गई थी। काम सीखने के बाद उसे पहले तीन हजार दिए जाने लगे। अब मालिक उसे दस हजार रुपये दे रहा है। जिस फैक्टरी में असलम काम करता है, वहां 13 लोग रहते हैं।
असलम बताता है कि सभी का खाना एक ही जगह बन जाता है, कम पैसों में खाने का भी जुगाड़ हो जाता है। वह ज्यादातर पैसे बचाकर अपनी मां के पास गांव में सिवान, बिहार भेज देता है। एक अन्य मजदूर रागिब ने बताया कि मीडिया ने मामले को जबरदस्ती बड़ा किया हुआ है। यदि मीडिया खबरें देना बंद कर दे तो जल्द ही मामला शांत हो जाएगा। इस बात से नाराज मजदूरों ने मीडिया से बदसलूकी भी की।