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Delhi NCR News: ब्रेन ट्यूमर से बुजुर्ग को लगा चीनी खाने का चस्का, रोजाना 100 ग्राम तक कर जाते चट
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89 वर्षीय बुजुर्ग में अचानक बदली खाने की पसंद, नमकीन से हुई नफरत, डॉक्टरों ने बताया दुर्लभ गौर्मंड-लाइक सिंड्रोम
सिमरन
नई दिल्ली। एक 89 साल के बुजुर्ग की खाने की पसंद अचानक ऐसी बदली कि परिवार हैरान रह गया। उन्हें मीठा इतना पसंद आने लगा कि वह रोजाना करीब 100 ग्राम तक चीनी खाने की जिद करने लगे। वहीं नमकीन और सामान्य भोजन से उन्होंने लगभग मुंह मोड़ लिया। शुरुआत में यह बदलाव सिर्फ स्वाद की पसंद लगा, लेकिन जांच में इसके पीछे दिमाग में दोबारा फैले कैंसर और उससे बने ट्यूमर का पता चला। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने इस दुर्लभ मामले को सामने रखा है।
डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का वर्ष 2021 में एडिनोकार्सिनोमा नामक कैंसर का इलाज हुआ था। करीब चार साल बाद शरीर में सोडियम की कमी के कारण उन्हें दौरे पड़ने लगे। साथ ही याददाश्त कमजोर होने लगी। इन लक्षणों के बाद डॉक्टरों ने एमआरआई कराया। जांच में पता चला कि कैंसर दोबारा फैल चुका है। दिमाग के बाएं भाग के पिछले हिस्से, यानी लेफ्ट पैरिटो-ऑक्सिपिटल क्षेत्र में ट्यूमर बन चुका था। ट्यूमर के कारण दिमाग में सूजन भी थी। डॉक्टरों के मुताबिक, सूजन और दबाव ने दिमाग के उन हिस्सों के कामकाज को प्रभावित किया, जो स्वाद, आनंद और भोजन से मिलने वाली संतुष्टि से जुड़े हैं।
जांच में मानसिक रोगों के लक्षण नहीं मिले
डॉ. पी वर्मा के अनुसार, मरीज का इलाज स्टीरियोटैक्टिक रेडियोथेरेपी से किया गया। इसके बाद परिवार ने उनके व्यवहार में असामान्य बदलाव महसूस किया। वह बड़ी मात्रा में चीनी खाने की मांग करने लगे और रोजाना करीब 100 ग्राम तक चीनी खाने के लिए अड़ जाते थे। इसके विपरीत नमकीन भोजन से उसे चिढ़ होने लगी और वह उसे खाने से इन्कार करते थे।
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परिवार की चिंता के बाद डॉक्टरों ने उनकी मानसिक स्थिति की भी जांच की। विस्तृत मूल्यांकन में अवसाद, भ्रम, पागलपन या ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक रोगों के लक्षण नहीं मिले। यानी बदलाव किसी सामान्य मानसिक बीमारी के कारण नहीं था, बल्कि खाने की पसंद और उससे मिलने वाली संतुष्टि में आया असामान्य परिवर्तन था।
दुर्लभ गौर्मंड-लाइक सिंड्रोम
डॉ. एम गुप्ता ने इस स्थिति को गौर्मंड-लाइक सिंड्रोम से जोड़ा है। यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में चोट या बीमारी के बाद व्यक्ति की भोजन संबंधी पसंद और खाने के प्रति व्यवहार बदल सकता है। आमतौर पर इसे दिमाग के सामने वाले दाहिने हिस्से में चोट या क्षति से जोड़ा जाता है। बुजुर्ग मरीज का मामला इसलिए खास था क्योंकि ट्यूमर दिमाग के पीछे बायीं ओर था। डॉक्टरों के अनुसार, इसी क्षेत्र में ट्यूमर और उससे हुई सूजन के कारण भोजन के स्वाद और उससे मिलने वाली संतुष्टि की धारणा प्रभावित हुई। नतीजा यह हुआ कि मरीज को मीठे में असामान्य आनंद मिलने लगा और उनकी भोजन संबंधी पसंद पूरी तरह बदल गई।
खाने की आदत में अचानक बदलाव को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि खाने की आदत, स्वाद या व्यवहार में अचानक और बड़ा बदलाव सिर्फ उम्र या जिद का नतीजा नहीं माना जाना चाहिए। खासकर बुजुर्गों में ऐसे बदलाव के पीछे कोई न्यूरोलॉजिकल समस्या भी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति की भोजन संबंधी पसंद अचानक असामान्य रूप से बदल जाए, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच से इसके पीछे छिपी गंभीर बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
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सिमरन
नई दिल्ली। एक 89 साल के बुजुर्ग की खाने की पसंद अचानक ऐसी बदली कि परिवार हैरान रह गया। उन्हें मीठा इतना पसंद आने लगा कि वह रोजाना करीब 100 ग्राम तक चीनी खाने की जिद करने लगे। वहीं नमकीन और सामान्य भोजन से उन्होंने लगभग मुंह मोड़ लिया। शुरुआत में यह बदलाव सिर्फ स्वाद की पसंद लगा, लेकिन जांच में इसके पीछे दिमाग में दोबारा फैले कैंसर और उससे बने ट्यूमर का पता चला। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने इस दुर्लभ मामले को सामने रखा है।
डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का वर्ष 2021 में एडिनोकार्सिनोमा नामक कैंसर का इलाज हुआ था। करीब चार साल बाद शरीर में सोडियम की कमी के कारण उन्हें दौरे पड़ने लगे। साथ ही याददाश्त कमजोर होने लगी। इन लक्षणों के बाद डॉक्टरों ने एमआरआई कराया। जांच में पता चला कि कैंसर दोबारा फैल चुका है। दिमाग के बाएं भाग के पिछले हिस्से, यानी लेफ्ट पैरिटो-ऑक्सिपिटल क्षेत्र में ट्यूमर बन चुका था। ट्यूमर के कारण दिमाग में सूजन भी थी। डॉक्टरों के मुताबिक, सूजन और दबाव ने दिमाग के उन हिस्सों के कामकाज को प्रभावित किया, जो स्वाद, आनंद और भोजन से मिलने वाली संतुष्टि से जुड़े हैं।
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जांच में मानसिक रोगों के लक्षण नहीं मिले
डॉ. पी वर्मा के अनुसार, मरीज का इलाज स्टीरियोटैक्टिक रेडियोथेरेपी से किया गया। इसके बाद परिवार ने उनके व्यवहार में असामान्य बदलाव महसूस किया। वह बड़ी मात्रा में चीनी खाने की मांग करने लगे और रोजाना करीब 100 ग्राम तक चीनी खाने के लिए अड़ जाते थे। इसके विपरीत नमकीन भोजन से उसे चिढ़ होने लगी और वह उसे खाने से इन्कार करते थे।
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परिवार की चिंता के बाद डॉक्टरों ने उनकी मानसिक स्थिति की भी जांच की। विस्तृत मूल्यांकन में अवसाद, भ्रम, पागलपन या ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक रोगों के लक्षण नहीं मिले। यानी बदलाव किसी सामान्य मानसिक बीमारी के कारण नहीं था, बल्कि खाने की पसंद और उससे मिलने वाली संतुष्टि में आया असामान्य परिवर्तन था।
दुर्लभ गौर्मंड-लाइक सिंड्रोम
डॉ. एम गुप्ता ने इस स्थिति को गौर्मंड-लाइक सिंड्रोम से जोड़ा है। यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में चोट या बीमारी के बाद व्यक्ति की भोजन संबंधी पसंद और खाने के प्रति व्यवहार बदल सकता है। आमतौर पर इसे दिमाग के सामने वाले दाहिने हिस्से में चोट या क्षति से जोड़ा जाता है। बुजुर्ग मरीज का मामला इसलिए खास था क्योंकि ट्यूमर दिमाग के पीछे बायीं ओर था। डॉक्टरों के अनुसार, इसी क्षेत्र में ट्यूमर और उससे हुई सूजन के कारण भोजन के स्वाद और उससे मिलने वाली संतुष्टि की धारणा प्रभावित हुई। नतीजा यह हुआ कि मरीज को मीठे में असामान्य आनंद मिलने लगा और उनकी भोजन संबंधी पसंद पूरी तरह बदल गई।
खाने की आदत में अचानक बदलाव को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि खाने की आदत, स्वाद या व्यवहार में अचानक और बड़ा बदलाव सिर्फ उम्र या जिद का नतीजा नहीं माना जाना चाहिए। खासकर बुजुर्गों में ऐसे बदलाव के पीछे कोई न्यूरोलॉजिकल समस्या भी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति की भोजन संबंधी पसंद अचानक असामान्य रूप से बदल जाए, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच से इसके पीछे छिपी गंभीर बीमारी का पता लगाया जा सकता है।