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अमित शाह को नहीं है दिल्ली के कार्यकर्ताओं पर ऐतबार

Fri, 30 Jan 2015 12:46 AM IST
Updated Fri, 30 Jan 2015 12:46 AM IST
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Amit Shah, do not trust Delhi bjp workers.

दिल्ली के चुनावी जंग को बेहद करीबी मुकाबले में तब्दील होने के फीडबैक के बीच प्रदेश भाजपा कार्यकर्ताओं के उम्मीद से कम उत्साह ने पार्टी हाईकमान को बेचैन कर दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ताओं के इस चुनावी जंग में खुद को पूरी तरह से झोंक देने के जज्बे को लेकर मुतमइन नहीं हैं।

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शायद प्रदेश कार्यकर्ताओं पर एतबार में आई इस कमी का ही नतीजा है कि पहले से ही दिल्ली के दंगल में जुटे बाहरी कार्यकर्ताओं की भरमार के बावजूद जंग जीतने के लिए शाह ने 13 राज्यों से कार्यकर्ताओं की और फौज बुलाई है।
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ये कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों के साथ जुटकर शाह के चुनावी प्रबंधन को जमीन पर अंजाम देंगे। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट बनारस से भी कार्यकर्ता दिल्ली आ रहे हैं।
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भाजपा अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की है। टिकटों बंटवारे में गड़बड़ी और किरन बेदी को चेहरा बनाने के बाद से प्रदेश के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक में अंदरखाने मायूसी का आलम है।

इसीलिए चुनाव अभियान में पार्टी की कामयाबी के लिए उनके जज्बे पर भी इस मायूसी का असर है। चुनावी प्रबंधन की अपनी खामियों को ढकने के प्रयास में भाजपा ने जहां एक ओर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर सियासी हमला तेज कर दिया है।

बाहरी कार्यकर्ता फूकेंगे दिल्ली में जान

Amit Shah, do not trust Delhi bjp workers.

वहीं बाहरी कार्यकर्ताओं के जरिए चुनावी अभियान और प्रबंधन की कमजोरी को भरने की कोशिश की है। भाजपा के चुनाव मैनेजरों में मायूसी का आलम यह है कि एक केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पार्टी ने पांचवीं गियर में अपनी सारी ताकत झोंक दी है, बाकी फैसला भगवान पर है।

वहीं आम आदमी पार्टी की चुनौतियों से निपटने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने चुनावी रणनीति में बदलाव भी किया है। बड़ी सभाओं के बजाय पार्टी का जोर छोटे-छोटे नुक्कड़ सभाओं के अलावा घर-घर प्रचार पर है।

शाह ने तय किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार बड़ी रैलियों के अलावा पूरी दिल्ली में 250 छोटी-छोटी चुनावी सभाएं होंगी। बड़े नेताओं की सभा में भीड़ की कमी को देखते हुए सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कुछ सभाएं रद्द कर दी गई हैं।

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