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दो जिस्म और केवल एक लीवर से चलेगी इन नन्हीं जानों की जिंदगियां
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 06 Mar 2017 10:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कस्तूरबा गांधी अस्पताल में महिला ने पेट से जुड़े जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। सिजेरियन डिलीवरी से हुए दोनों बच्चों का लीवर एक है। हालत थोड़ी सुधरने के बाद इनकेे अन्य अंगों की जांच होगी। फिलहाल बच्चे गहन चिकित्सा कक्ष में विशेषज्ञों की निगरानी में हैं।
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गायनी विभाग की डॉक्टर मारुति सिंह के मुताबिक, दिल्ली निवासी महिला ने दो मार्च को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। एक निजी अस्पताल ने उसे सिजेरियन डिलीवरी के लिए कस्तूरबा गांधी रैफर किया था।
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महिला के दो अल्ट्रासाउंड निजी अस्पताल में हुए थे। जबकि एक डिलीवरी से पहले कस्तूरबा गांधी में हुए, जिसकी रिपोर्ट में जुड़वां बच्चे आए। हालांकि, सिजेरियन डिलीवरी के बाद पता चल पाया कि बच्चों का पेट जुड़ा हुआ है।
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डॉक्टर की रिपोर्ट, बच्चे रहेंगे सलामत
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- फोटो : अमर उजाला
प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि बच्चों का लीवर एक है। दोनों जुड़वा को बच्चों के विशेषज्ञों की देखरेख में रखा गया है। वे फीड कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें अभी मां का दूध नहीं दिया गया है।
बच्चों की हालत में थोड़ा सुधार आते ही उनकी एमआरआई होगी। इसके बाद पता चल पाएगा कि उनके अन्य अंग जुड़े हुए हैं या नहीं। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे के इलाज के लिए बच्चों को किसी बड़े अस्पताल में रैफर किया जाएगा।
डॉ. सिंह का कहना है कि बेशक बच्चे लीवर से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनकी जीवित रहने की संभावना काफी है। महिला के गर्भवती होने के दौरान अल्ट्रासाउंड किए गए थे, लेकिन उसमें जुड़वा बच्चे पेट से जुड़े होने के साथ लीवर एक होने की जानकारी नहीं मिल पाई थी।
हालांकि, यदि डाक्टर अनुभवी है तो कई बारअल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को देखकर समझ जाता है। इस मामले में निजी अस्पताल का डाक्टर रिपोर्ट को पकड़ नहीं पाया होगा।
बच्चों की हालत में थोड़ा सुधार आते ही उनकी एमआरआई होगी। इसके बाद पता चल पाएगा कि उनके अन्य अंग जुड़े हुए हैं या नहीं। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे के इलाज के लिए बच्चों को किसी बड़े अस्पताल में रैफर किया जाएगा।
डॉ. सिंह का कहना है कि बेशक बच्चे लीवर से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनकी जीवित रहने की संभावना काफी है। महिला के गर्भवती होने के दौरान अल्ट्रासाउंड किए गए थे, लेकिन उसमें जुड़वा बच्चे पेट से जुड़े होने के साथ लीवर एक होने की जानकारी नहीं मिल पाई थी।
हालांकि, यदि डाक्टर अनुभवी है तो कई बारअल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को देखकर समझ जाता है। इस मामले में निजी अस्पताल का डाक्टर रिपोर्ट को पकड़ नहीं पाया होगा।