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अमर उजाला की पड़तालः बस्ते के बोझ तले दबता बचपन, बच्चे कक्षा के मुकाबले कंधों पर ढो रहे अधिक भार
Wed, 16 Oct 2019 12:50 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 16 Oct 2019 12:50 AM IST
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बच्चे अपनी कक्षा के मुकाबले कंधों पर अधिक बोझ ढो रहे
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षा निदेशालय ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी स्कूलों को बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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अमर उजाला ने मंगलवार को स्कूलों के बाहर जाकर बच्चों के बस्ते के बोझ का रिएलिटी चेक किया। इसमें पाया गया कि बच्चे अपनी कक्षा के मुकाबले में कंधों पर अधिक बोझ ढो रहे थे। इतने भारी भरकम बस्तों के कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है।
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अमर उजाला ने नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के कुछ स्कूलों के बाहर बच्चों के बस्ते को चेक किया। निदेशालय ने पहली से दूसरी कक्षा तक के बच्चों के लिए वजन 1.5 किलो निर्धारित किया है, लेकिन देखा गया कि बस्ते का वजन इतना अधिक था कि इससे उनकी पीठ झुक रही थी। वहीं छोटे बच्चों के इन बस्तों को न उठा पाने के कारण कई अभिभावक उन्हें अपने कंधों पर लिए हुए थे।
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तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों के बस्तों का भार भी तीन किलो से अधिक था। बच्चे बस्ते में सभी पुस्तकें व नोटबुक लेकर आए। कुछ अभिभावकों ने कहा कि पता नहीं चलता कि शिक्षक कौन सी पुस्तक या नोट बुक मांग ले। इस कारण से वह सभी पुस्तकें व नोटबुक बस्ते में रख देते हैं। पानी की बोतल बस्ते के वजन को और बढ़ा रही है।
सोमवार को रिमाइंडर के रूप में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे में कई स्कूलों को इसकी जानकारी नहीं थी। हालांकि उन्हें बीते साल के दिशा-निर्देशों की जानकारी थी। अभिभावक भी इस बस्ते के वजन से अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित दिखाई दिए। कुछ बच्चों के बैग में अतिरिक्त पाठ्यसामग्री भी दिखाई दी, जबकि दिशा-निर्देशों में इसकी मनाही है।