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नोएडा: 30 हजार बिके फ्लैटों पर खतरा मंडराया

Tue, 04 Feb 2014 04:32 PM IST
अमर उजाला, नोएडा
अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 04 Feb 2014 04:32 PM IST
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Allahabad High Court says to return land of farmers

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को पतवाड़ी की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को रद्द करने के पुराने आदेश पर अमल करने को कहकर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को तगड़ा झटका दिया है।

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यह आदेश ऐसे समय पर आया है, जब प्राधिकरण विकास कार्य में करोड़ों रुपये लगा चुका है और बिल्डरों समेत कई सेक्टरों की जमीन आवंटित की जा चुकी है। इस पर काफी हद तक निर्माण भी हो चुका है।
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19 जुलाई 2011 को कोर्ट ने पतवाड़ी की जमीन अधिग्रहण इसलिए रद्द कर दी थी कि जमीन जिस उद्देश्य से अधिग्रहीत की गई, उसका प्रयोग उस रूप में नहीं किया गया।

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प्राधिकरण ने उस वक्त उन किसानों के साथ बैठक की जिनकी जमीन प्राधिकरण ने ली थी। किसानों से समझौता किया गया और उनके शपथ पत्र तैयार करके कोर्ट में दाखिल किए गए।

इतना ही नहीं प्राधिकरण ने बिना देरी किए समझौता के तहत अतिरिक्त मुआवजा का भी वितरण कर दिया। जब कोर्ट में आबादी का लाभ, अतिरिक्त मुआवजा और गांव के विकास की पूरी रिपोर्ट दाखिल की गई तो कोर्ट ने कहा था कि अगर सभी किसान राजी हैं तो उन्हें कोई एतराज नहीं है।

मगर प्राधिकरण से इसमें कहीं न कहीं भारी चूक हो गई और जरूरी कागजात कोर्ट में दाखिल नहीं किए जा सके। किसानों को करीब चार हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दे दिया गया और किसानों ने जितनी आबादी मांगी, प्राधिकरण ने मना नहीं किया।

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हालांकि उस दौरान कुछ किसान नाराज रहे और इस बात पर डटे रहे कि उन्हें जमीन ही वापस चाहिए। यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। वहां पर भी प्राधिकरण को जब राहत नहीं मिली तो फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुराने आदेश को ही पालन करने के आदेश दिए हैं।

...तो फंस जाएंगे बिल्डर
पतवाड़ी की 589 हेक्टेयर जमीन पर करीब एक दर्जन बिल्डर प्रोजेक्ट हैं। कई बिल्डर तो ऐसे हैं जिनके फ्लैटों की ढांचागत व्यवस्था पूरी खड़ी हो चुकी है। करीब 30 हजार बिक भी चुके हैं। किसानों को जमीन वापस किए जाने के आदेश के बाद बिल्डरों के साथ-साथ निवेशकों पर भारी संकट छा गया है।


आथॉरिटी की इन योजनाओं पर भी होगा असर
ग्रेनो प्राधिकरण ने भी सेक्टर-2 और 3 में करीब 600 प्लॉटों को आवंटित किया था। लोग उसकी समय पर किस्तें भी जमा कर रहे हैं और प्लाटों पर पजेशन देने की तैयारी भी चल रही है। लेकिन अब मामला फिर फंस गया है। इतना ही नहीं प्राधिकरण ने शैक्षिक संस्थानों को भी जमीन आवंटित की थी, कुछ इंस्टीट्यूटों में पढ़ाई भी जारी है। प्राधिकरण द्वारा निकाली गई फ्लैट योजनाओं का अब क्या होगा, फिलहाल किसी को पता नहीं है।

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