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नौकरी भले ही छोड़ दी लेकिन कुछ खास हैं दिल्ली की पहली 'आम औरत' में
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 13 Jul 2016 06:08 PM IST
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सुनीता केजरीवाल
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आज सुबह आप लोगों ने जब अपना अखबार उठाया होगा तो उस खबर पर नजर जरूर गई होगी जिसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल के स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने की खबर थी।
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कहा जा रहा है कि 22 साल की अपनी नौकरी करने के बाद सुनीता ने नौकरी इसलिए छोड़ दी क्योंकि उन्हें केंद्र और दिल्ली की लड़ाई के बीच अपने प्रताड़ित होने का डर था।
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केंद्र और दिल्ली की लड़ाई में पिसकर सुनीता ने अपनी नौकरी भले ही छोड़ दी हो लेकिन वो देश के अन्य राजनेताओं की पत्नियों से बिल्कुल अलग हैं। 2015 में जब केजरीवाल चुनाव जीते थे उसके बाद अंग्रेजी न्यूज पोर्टल फर्स्ट पोस्ट ने उनकी तुलना अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा तक से की थी। वहीं इकोनॉमिक टाइम्स ने उन्हें 'दिल्ली की पहली आम औरत' कहा था।
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राजनीति की चकाचौंध से दूर रहने वाली सुनीता अन्य नेता पत्नियों की तरह अपने पति की परछाईं भर बनकर नहीं रहीं बल्कि उन्होंने हमेशा अपना स्टैंड लिया और दिल्ली सरकार के केंद्र से लाख मतभेद होने के बावजूद अपनी आईआरएस की नौकरी को जारी रखा और पूरी गरिमा के साथ उसे किया।
वो सुनीता ही थीं जिनकी वजह से केजरीवाल राजनीति में आ सके क्योंकि सुनीता हमेशा ही अरविंद केजरीवाल के परिवार के लिए एक ढाल बनकर रहीं व उन्हें थाली में रोटी और सिर पर छत के लिए के लिए कभी चिंता नहीं करनी पड़ी। यही कारण है कि केजरीवाल निश्चिंत होकर अपनी राजनीति पर ध्यान लगा सके और एक नहीं दो-दो बार दिल्ली के सीएम पद पर आसीन हुए।
मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहने वाली सुनीता ने कभी अपने आप को आदर्श बीवी दिखाने की कोशिश नहीं कि जो पति व परिवार के लिए अपनी पहचान का त्याग कर देती है। उन्होंने केजरीवाल की रैलियों से नदारद रहकर अपने घर-परिवार को समय देते हुए उसे संभाला जो शायद उनके बिना नहीं हो पाता।
केजरीवाल को लोगों ने चाहे जो भी कहा हो लेकिन सुनीता हर मुसीबत में उनके पीछे खड़ी रहने वाली बनीं सुनीता। सुनीता ने हमेशा से अपने फैसले खुद लिए हैं और खुद को राजनीतिक पति की छाया से दूर रखते हुए आज भी जो फैसला लिया वो सिर्फ इसलिए कि, कहीं दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की लड़ाई में उन्हें पिसना ना पड़े जिससे उनके काम पर असर पड़े।