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शिवाजी महाराज का इतिहास देश की सांस्कृतिक चेतना का आधार : डॉ. सुधांशु त्रिवेदी
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सांसद बोले इतिहास को पराजय के नजरिये से नहीं, संघर्ष व विजय की परंपरा से देखना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन और विरासत में मुख्य अतिथि व राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि शिवाजी महाराज का इतिहास केवल किसी राजा या मराठा शक्ति की गाथा नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का आधार है।
उन्होंने कहा कि इतिहास को केवल पराजय और गुलामी के नजरिये से देखने के बजाय भारतीय समाज के संघर्ष, प्रतिरोध और विजय की परंपरा को भी समझना चाहिए। शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा स्थापित कर स्वाभिमान और आत्मविश्वास पैदा किया, जो आगे चलकर राष्ट्रीय आंदोलनों की नींव बनी।
उन्होंने जेएनयू कुलगुरु प्रो. शांतिश्री पंडित के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में सकारात्मक बदलावों की सराहना की और कहा कि एक समय जेएनयू गलत कारणों से चर्चा में था, अब वह सकारात्मक पहलुओं के लिए भी जाना जा रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन और विरासत में मुख्य अतिथि व राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि शिवाजी महाराज का इतिहास केवल किसी राजा या मराठा शक्ति की गाथा नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का आधार है।
उन्होंने कहा कि इतिहास को केवल पराजय और गुलामी के नजरिये से देखने के बजाय भारतीय समाज के संघर्ष, प्रतिरोध और विजय की परंपरा को भी समझना चाहिए। शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा स्थापित कर स्वाभिमान और आत्मविश्वास पैदा किया, जो आगे चलकर राष्ट्रीय आंदोलनों की नींव बनी।
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उन्होंने जेएनयू कुलगुरु प्रो. शांतिश्री पंडित के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में सकारात्मक बदलावों की सराहना की और कहा कि एक समय जेएनयू गलत कारणों से चर्चा में था, अब वह सकारात्मक पहलुओं के लिए भी जाना जा रहा है।
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