{"_id":"cea8b7c6d8c1c366b1a6714385553ad4","slug":"alert-recovery-of-electricity-bills-are-bogus","type":"story","status":"publish","title_hn":"होशियार! फर्जी बिजली बिलों से हो रही वसूली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
होशियार! फर्जी बिजली बिलों से हो रही वसूली
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 24 Mar 2014 12:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्जी कनेक्शनों के फर्जी एरियर से उपभोक्ता की नींद उड़ गई है। संभाग में करीब पांच लाख उपभोक्ताओं के नाम से फर्जी बिल जारी किए गए हैं, जिले में इनकी संख्या 50 हजार है। जबकि बिल का भुगतान लगातार किया जा रहा है। इस फर्जीवाड़े की आड़ में उपभोक्ताओं से वसूली हो रही है।
पावर कारपोरेशन को जनवरी-फरवरी के 235 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष मार्च में 465 करोड़ रुपये जुटाने है। चेयरमैन ने बिलों के एरियर के आधार पर यह लक्ष्य दिया है। उपभोक्ताओं को बिल जारी कर उनसे रकम मांगी जा रही है। बिल वसूली के इस अभियान में नया घपला सामने आया है।
महानगर के हजारों उपभोक्ताओं के नाम पर डबल कनेक्शन हैं। कनेक्शन नंबर अलग-अलग हैं, उपभोक्ता का नाम, पता, विद्युत लोड, डीटी और आईडी समान हैं। वास्तविक कनेक्शन का उपभोक्ता लगातार बिल भुगतान कर रहे हैं, दूसरे का बिल अदा नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
बकाएदारों की सूची लेकर जब अफसर कनेक्शन काटने पहुंचे तो उपभोक्ताओं ने भुगतान की रसीद दिखाई। इससे असमंजस की स्थिति बनी है। कनेक्शनों को आनलाइन करने के दौरान पिछले वर्ष यह घपला हुआ। रीडिंग मशीन ने भी कंप्यूटरों में अलग कनेक्शन नंबर तैयार कर दिए।
एसई एसबी यादव का कहना है कि गोलाइव करने में पुराने और बंद सभी कनेक्शन एक्टिव हो जाने से फेक एरियर भी बिल टारगेट में जुड़ गया। मार्च के बाद ठीक हो जाएगा। फर्जी बिल के आधार पर वसूली नहीं की जाएगी।
विज्ञापन
पावर कारपोरेशन को जनवरी-फरवरी के 235 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष मार्च में 465 करोड़ रुपये जुटाने है। चेयरमैन ने बिलों के एरियर के आधार पर यह लक्ष्य दिया है। उपभोक्ताओं को बिल जारी कर उनसे रकम मांगी जा रही है। बिल वसूली के इस अभियान में नया घपला सामने आया है।
विज्ञापन
महानगर के हजारों उपभोक्ताओं के नाम पर डबल कनेक्शन हैं। कनेक्शन नंबर अलग-अलग हैं, उपभोक्ता का नाम, पता, विद्युत लोड, डीटी और आईडी समान हैं। वास्तविक कनेक्शन का उपभोक्ता लगातार बिल भुगतान कर रहे हैं, दूसरे का बिल अदा नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
बकाएदारों की सूची लेकर जब अफसर कनेक्शन काटने पहुंचे तो उपभोक्ताओं ने भुगतान की रसीद दिखाई। इससे असमंजस की स्थिति बनी है। कनेक्शनों को आनलाइन करने के दौरान पिछले वर्ष यह घपला हुआ। रीडिंग मशीन ने भी कंप्यूटरों में अलग कनेक्शन नंबर तैयार कर दिए।
एसई एसबी यादव का कहना है कि गोलाइव करने में पुराने और बंद सभी कनेक्शन एक्टिव हो जाने से फेक एरियर भी बिल टारगेट में जुड़ गया। मार्च के बाद ठीक हो जाएगा। फर्जी बिल के आधार पर वसूली नहीं की जाएगी।