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दिल्लीवासियों सावधान...राजधानी में हर घंटे चोरी हो रहे हैं छह वाहन

Mon, 17 Dec 2018 01:37 AM IST
vivek shukla शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: vivek shukla Updated Mon, 17 Dec 2018 01:37 AM IST
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Alert Delhi Six vehicles stolen every hour in capital
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे से राजधानी दिल्ली में हर घंटे औसतन छह वाहन चोरी हो जाते हैं। चोर बड़े ही आराम से वाहनों को चोरी कर उन्हें देश के कई राज्यों के अलावा नेपाल तक भेज देते हैं। कमाल की बात यह है कि वाहन चोरी के आंकड़े घटने की बजाए बढ़ते ही जा रहे हैं। पिछले साल एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच की समयावधि में वाहन चोरी का आंकड़ा हर घंटे पांच वाहन चोरी का था। विशेषज्ञ कहते हैं कि थोड़ी सी सावधानी से हम वाहन चोरी की संभावनाओं को कम कर सकते हैं। 

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दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018 में एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच अब तक 42192 वाहन चोरी हो चुके हैं। इसका अगर औसत निकाला जाए तो रोजाना करीब 126 से अधिक वाहन चोरी हो जाते हैं। इसी समयावधि के दौरान वर्ष 2017 में 37180 वाहन चोरी हुए थे। इस आंकड़े के अनुसार रोजाना करीब 111 से अधिक वाहन रोजाना चोरी हो रहे थे। वहीं, यदि हम 2016 के आंकड़ों की बात करें तो पूरे साल में (एक जनवरी से 31 दिसंबर के बीच) कुल 38644 वाहन चोरी हुए थे।
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इसका हर दिन का औसत देखें तो वह 105 वाहन रोजाना चोरी का था। आंकड़ों पर गौर करने से पता चलता है कि वाहन चोरी की घटनाओं पर बजाए लगाम लगने के वह बढ़ती ही जा रही हैं। वहीं, मामले पर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बार्डर इलाके के लोग बड़ी संख्या में दिल्ली आकर अपने वाहन चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं, जिससे दिल्ली में वाहन चोरी का आंकड़ा बढ़ जाता है। 

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चोरी के वाहनों का क्या होता है

आपके दिमाग में यह सवाल जरूर उठता होगा कि यदि रोजाना 126 दोपहिया व कार चोरी होती हैं तो इनका क्या होता है। जानकारों का कहना है कि वाहन चोरों का अरबों रुपये का कारोबार है। उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में इनका कारोबार फैला है। ज्यादातर मामलों में वाहन चोरी कर उन्हे पुर्जोँ में बांट (डिस्मेंटल) दिया जाता है। वाहनों के पुर्जे पुराने सामान के बाजार में पहुंच जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में वाहनों के फर्जी कागजात तैयार कर उन्हें उत्तर-पूर्वी राज्यों व नेपाल तक भेज दिया जाता है। ऐसे मामलों में चोरी के वाहनों की अच्छी कीमत मिल जाती है। 
 
रात में दो से चार बजे के बीच होती है चोरी
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब तक पकड़े गए ज्यादातर वाहन चोरों ने खुलासा किया है कि अक्सर वाहनों को रात में दो से चार बजे के बीच चोरी किया जाता है। चोरों को लगता है कि इस समयावधि में सड़कों पर पुलिस न के बराबर होती है। इसके अलावा लोग भी उस समय गहरी नींद में होते हैं। वाहन चोरी कर उन्हें किसी सुरक्षित पार्किंग जैसे मेट्रो या अन्य पार्किंग में खड़ा कर दिया जाता है। जिसके बाद मौका लगते ही उसे ठिकाने लगा दिया जाता है। अब तक मेवात, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादनगर, मुरादाबाद, संभल आदि जगहों पर चोरी के वाहनों को डिस्मेंटल किए जाने का पता चला है। अक्सर पुलिस इन स्थानों पर छापामारी करती रहती है। 

इन उपायों से चोरी की संभावनाएं की जा सकती हैं कम
- अपने वाहनों को पार्किंग में ही खड़ा करें और उसमें सिक्योरिटी अलार्म जरूर लगवाएं।
- कार में गियर लॉक लगाकर कुछ हद तक चोरी की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। 
- दोपहिया वाहन में व्हील लॉक जरूर लगवाएं। रात में गली में खडे़ वाहन में लोहे की जंजीर व ताला लगा सकते हैं। 
- कार के शीशों पर यदि नंबर लिखवा दिया जाए तो भी उसके बरामद होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 
- कार में जीपीएस सिस्टम लगाकर चोरी हुई कार को बरामद करने में मदद मिल सकती है। 
 
वाहन चोरी के पिछले वर्षों के कुछ आंकड़े :
वर्ष                आंकड़े 

2018            42192 
2017            37180 
2016            38644 
2015            32729 
2014            23384 
2013            14916 
 
(वर्ष 2018 के आंकड़े जनवरी से 30 नवंबर तक के ही हैं)
 
चोरी के अन्य मामलों में भी पीछे नहीं है राजधानी 
वाहन चोरी के अलावा घरों, दुकानों व अन्य जगहों पर चोरी, सेंधमारी, मोबाइल व अन्य सामान चोरी के मामलों में दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना राजधानी में चोरी की 389 से अधिक वारदात हो रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, हर घंटे चोर 16.20 लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। जनवरी से 30 नवंबर 2018 के आंकड़ों पर गौर करें तो चोरों ने 1,29,935 लोगों को किसी न किसी तरह अपना शिकार बनाया। इसी समयावधि में पिछले साल यह आंकड़ा 1,22,371 का था। हालांकि, इन आंकड़ों के बढ़ने के पीछे दिल्ली पुलिस अधिकारी तर्क देते हैं कि चोरी की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज होने की वजह से लोग छोटी-छोटी चीजों के गुम होने पर भी चोरी का मामला दर्ज करा देते हैं। इसकी वजह से चोरी के आंकड़े बहुत ज्यादा होते हैं। 
(नोट: सभी आंकड़े दिल्ली पुलिस की वेबसाइट द्वारा जारी किए गए हैं)
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