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दिल्ली से ऑनलाइन जयपुर में हल कर रहे थे एयरफोर्स का पेपर, पर्दाफाश
Thu, 26 Sep 2019 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 26 Sep 2019 05:57 AM IST
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने ऑनलाइन पेपर हल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर सरगना समेत 7 मुन्नाभाई को पकड़ा है। ये दिल्ली में बैठकर जयपुर में हो रहे एयरफोर्स के ग्रुप एक्स व वाई पद के पेपर सॉल्व कर रहे थे। इसके लिए स्क्रीन शेयरिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था।
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आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस मुखर्जी नगर पहुंची तो एक आरोपी नीचे कूद गया। उसके पैर में फैक्चर है। अपराध शाखा की टीम अब लैब मालिक को पकड़ने के लिए दबिश देने जयपुर गई है।
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अपराध शाखा के डीसीपी राजेश देव ने बताया कि एसीपी जसवीर सिंह की टीम को 22 सितंबर को एयरफोर्स में एक्स व वाई श्रेणी के पदों के लिए हो रही ऑनलाइन परीक्षा के पेपर सॉल्व करने के लिए कुछ लोगों के मुखर्जी नगर के गांधी विहार में जमा होने की सूचना मिली थी।
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जसवीर सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर नीरज चौधरी, इंस्पेक्टर विजय कुमार समारिया, एसआई सुरेंद्र राणा, जगदीश पाल, एएसआई नरेंद्र आदि की टीम ने गांधी विहार में तीसरी मंजिल पर दबिश दी। पुलिस को देखकर जींद निवासी संदीप तीसरी मंजिल से नीचे कूद गया। उसका एक पैर टूट गया। उसे लोकनायक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ठीक होने के बाद उसे गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस ने वहां से हरियाणा के भिवानी निवासी नरेश, अमन और राकेश, जींद निवासी अंकुश, मंजीत और विक्रांत व हिसार निवासी हरदीप को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के समय ये सभी इंडियन एयरफोर्स की ऑनलाइन परीक्षा के प्रश्न पत्र को सॉल्व कर रहे थे। नरेश गिरोह का सरगना है और वही लैपटॉप चला रहा था। बाकी आरोपी प्रश्नों के उत्तर बता रहे थे।
सॉफ्टवेयर से आपस में जुड़ जाते हैं कंप्यूटर
आरोपी स्क्रीन शेयरिंग सॉफ्टवेयर के जरिये पेपर ऑनलाइन सॉल्व कर रहे थे। इस सॉफ्टवेयर के जरिये ऑनलाइन परीक्षा दे रहे परीक्षार्थी का कंप्यूटर और आरोपियों का कंप्यूटर आपस में जुड़ जाते हैं। इससे कंप्यूटर की स्क्रीन शेयर हो जाती है। दो कंप्यूटरों को आपस में जोड़ने के लिए जो पासवर्ड आता था, उसे वे शेयर कर लेते थे।
इनके कब्जे से 14 लैपटॉप और मॉडम बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दबिश के समय कुछ आरोपी कई लैपटॉप को तोड़कर फरार हो गए थे। इस सॉफ्टवेयर से दो कंप्यूटर तभी जुड़ सकते हैं, जब दोनों में यह लोड हो। लैब का कंप्यूटर जुड़ने के लिए उसके मालिक की मिलीभगत जरूरी है।
चंडीगढ़ की लैब में काम करता था सरगना
गिरोह के सरगना नरेश कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह चंडीगढ़ में एक लैब में काम करता था। वहीं उसने सीखा कि स्क्रीन शेयरिंग सॉफ्टवेयर के जरिये ऑनलाइन परीक्षा में गड़बड़ी की जा सकती है। इसके बाद उसने उम्मीदवारों को तलाश करना शुरू कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों के उम्मीदवारों को तलाश करने के लिए उसने दोस्तों का नेटवर्क खड़ा करना शुरू किया। इसके इन्होंने मुखर्जी नगर के गांधी विहार में एक घर किराए पर लिया।
लीक भी कर चुका है कई परीक्षाओं के पेपर
नरेश कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह कई संस्थाओं व एजेंसियों के ऑनलाइन प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर लीक और सॉल्व कर चुका है। आरोपी एक-डेढ़ वर्ष से सॉफ्टवेयर के जरिये परीक्षार्थी के ऑनलाइन पेपर सॉल्व कर रहा था। बीकॉम कर चुका नरेश हिसार में ट्यूटर था। वह मुखर्जी नगर में यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने आया था। वित्तीय परेशानी के कारण चंडीगढ़ वह चला गया और ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली लैब में काम करने लगा। अंकुश उम्मीदवारों की तलाश करता था। ये एक उम्मीदवार से 5 से 10 लाख रुपये लेते थे।