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सावधान! कोरोना काल में खतरनाक हो सकता है वायु प्रदूषण, हो जाता है अधिक घातक
Fri, 24 Jul 2020 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 24 Jul 2020 06:03 AM IST
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air pollution
- फोटो : social media
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वायु प्रदूषण का कोरोना की मृत्यु दर पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि प्रदूषित करने वाले महीन कणों के हर एक माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर की बढ़ोतरी के साथ कोरोना से होने वाली मौतों में आठ फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि वायु गुणवत्ता नीतियों के निर्धारण में वैज्ञानिक सोच अपनाई जाए जिससे वायु प्रदूषण की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
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आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष, प्रो. एस एन त्रिपाठी ने महामारी के इस दौर में वायु प्रदूषण को जन स्वास्थ्य से जोड़ते हुए बताया कि वायु प्रदूषण का सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ता है। उनके दिल्ली की हवाओं पर केंद्रित पांच रिसर्च पेपर्स ने इस बात को साबित किया है। इसलिए वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने वाली नीतियों का आधार प्रशासनिक की जगह वैज्ञानिक होना चाहिए।
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लंग केयर फाउंडेशन के डॉ अरविंद कुमार ने भी इस बात को आगे बढ़ाते हुए साफ किया की विश्व के तमाम देशों में इस बात को सिद्ध करते शोध हुए हैं। इसमें इटली में हुआ शोध फिलहाल सबसे विश्वसनीय प्रतीत होता है, इसके अनुसार जैसे ही हवा में पीएम 2.5 में हर एक माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि हुई इसी के साथ कोरोना की मृत्यु दर में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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इससे साफ है कि कोरोना संक्रमण के असर पर प्रदूषण भी प्रभाव डाल रहा है। लॉकडाउन का असर पर्यावरण पर साफ तौर पर दिखा है । इस दौरान हवा स्वच्छ हुई तो फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त तमाम मरीजों की हालत में सुधार होता दिखा लेकिन ये स्थिति हमेशा ऐसी नहीं रहेगी क्योंकि जैसे जैसे प्रदूषण बढेगा, वैसे-वैसे इन मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है।
इंडिया क्लाइमेट कोलैब्रेटिव की श्लोका नाथ ने बताया की धूल के महीन कण यानी पीएम 2.5 का सीधा संबंध कोरोना संक्रमण की मृत्युदर से है। इस परेशानी से निपटने के लिए जरूरी है कि वायु प्रदूषण की गुणवत्ता को मापने के लिए पर्याप्त मॉनीटरिंग सेंटर विकसित किए जाएं। एक अनुमान के मुताबिक देश को 4000 ऐसे स्टेशनों की जरूरत है। इसके लिए तकरीबन 10000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।