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कभी भी फट सकता था प्लेन, पिता को बचाने के लिए बेटी ने लगाई जान की बाजी

Thu, 26 May 2016 06:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 26 May 2016 06:33 PM IST
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air ambulance crash in najafgarh: daughter put her life on risk for his father's life

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प्लेन की क्रैश लैंडिंग के बाद जब पायलट सबको उतरने के लिए आवाज लगा रहा था तब जूही अपने बीमार का स्ट्रेचर प्लेन से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी।

मंगलवार को दिल्ली के नजफगढ़ में जब पटना से दिल्ली आ रही एक एयर एंबुलेंस बीच किंग एयर सी-90A की क्रैश लैंडिंग हुई, उस वक्त प्लेन में मौजूद सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए नीचे भाग रहे थे। उस वक्त एक लड़की थी जो अपने बेहोश पिता की जान बचाने की कोशिश कर रही थी।

23 वर्षीय जूही रॉय ही वो लड़की है जो अपने बीमार पिता के साथ पटना से दिल्ली उनके इलाज के लिए एयर एंबुलेंस में आई थी। जब पायलट प्लेन लैंड करने के बाद सबको उतरने के लिए आवाज लगा रहा था, तो सभी अपनी जान बचाने के लिए प्लेन से उतर रहे थे लेकिन जूही ने अपने पिता को देखा।
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वो शांति से स्ट्रेचर पर लेटे हुए थे। पायलट ने सबको आगाह किया कि प्लेन कभी भी फट सकता है, तब जूही उठी और मदद के लिए आवाज लगाई लेकिन अधिकतर लोग प्लेन से उतर चुके थे।
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तब उसने अपने पिता के स्ट्रेचर को एक तरफ से खींचना शुरू किया। उसकी आवाज सुनकर पायलट आया और उसने स्ट्रेचर को दूसरी तरफ से पकड़ा और दोनों ने मिलकर जूही के पिता को प्लेन से निकाला। बता दें कि जूही नोएडा के एक कॉलेज से एमबीए कर रही है और हाल ही में वो अपने पिता को देखने पटना गई थी।

कभी भी फट सकता था प्लेन पर दोबारा उसमें गई जूही

air ambulance crash in najafgarh: daughter put her life on risk for his father's life

जूही और पायलट ने मिलकर उसके पिता को प्लेन से बाहर निकालकर एक पेड़ की छांव में रखा। लेकिन जूही फिर प्लेन की ओर जाने लगी जबकि वो जानती थी कि वो प्लेन कभी भी ब्लास्ट कर सकता है और अगर वो दोबारा उसमें गई तो उसकी जान भी जा सकती है। लेकिन उसने अपने पिता की जान के आगे अपनी परवाह नहीं की।

जूही दोबारा प्लेन में सिर्फ इसलिए गई ताकि वो ऑ‌क्सीजन सिलिंडर ला सके जिसकी वजह से उसके पिता की सांसे चल रही हैं। जूही अंदर गई अपने पिता से जुड़े सामान, उनकी मेडिकल फाइल और पैसे आदि वापस लाई। इसके बाद उसने 100 नंबर डायल किया और एक स्थानीय निवासी की मदद से पुलिस को घटनास्थल की सटीक लोकेशन दी।

इस पूरे हादसे में अपनी और अपने पिता की जान बचने के लिए जूही ने मां काली और एयर एंबुलेंस के जांबाज पायलट की सूझबूझ को सारा श्रेय दिया। इस वक्त जूही का पूरा परिवार गुड़गांव के एक अस्पताल में है, जहां उसके पिता का इलाज चल रहा है। जूही की मां जो एयर एंबुलेंस हादसे के कुछ घंटों बाद ही पटना से ‌एक अन्य फ्लाइट से दिल्ली पहुंची, कहती हैं कि मेरी बेटी ने अपने पिता की जान बचाई है।

जूही की मां अपनी बेटी प्रशंसा में कहती हैं कि उसने बहादुरी का परिचय देते हुए उस समय प्लेन में दोबारा जाने की हिम्मत दिखाई जब दूसरे लोग सिर्फ देख रहे थे। जूही अब भी प्लेन क्रैश के सदमे से बाहर नहीं आ सकी है और वो अपने पिता के स्वास्थ के लिए काफी चिंतित है। डॉक्टरों का कहना है कि जूही के पिता इलाज की स्थिति में नहीं हैं।

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