दिहाड़ी मजदूर का नर्स बेटा बना IAS, टॉमा सेंटर में पढ़ाई कर हासिल की 574वीं रैंक
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प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और न ही समय और परिस्थितियां उसके लिए बाधक बनती है। इस बात को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक नर्सिंग ऑफिसर (मेल नर्स) ने सही साबित कर दिखाया है।
दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने नर्स से सिविल सर्वेंट बनने तक का सफर तय किया है। परिस्थितियों से तंग आकर अपने सपने छोड़ने वाले युवकों के लिए एम्स के नर्स जोसफ के. मैथ्यू प्रेरणास्त्रोत हैं, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए हैं।
पिता दिहाड़ी मजदूर, माता गृहणी और खुद एम्स ट्रॉमा सेंटर के सर्जिकल आईसीयू में तैनात जहां मरीज की जिंदगी हर पल जिंदगी और मौत के बीच झुलती रहती है। यहां कई बार ऐसे मरीजों की जिंदगी की तार टूट जाती है, इन परिस्थतियों में भी अपने को संभालना और यूपीएससी जैसी परीक्षा के लिए अपने को तैयार करना आसान नहीं होता। लेकिन जोसफ ने अपने दृढ़ निश्चिय से अपने आप को इस कदर तैयार किया और अपने लक्ष्य को तय किया।
जोसफ ने की मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ
प्रतिदिन औसतन चार से पांच घंटे की पढ़ाई करके ही इस लक्ष्य को पाया। उनके साथियों और सीनियर को इस बात की जानकारी थी कि वे सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं, लिहाजा साथियों को सहयोग मिलता रहा था।
जोसफ ने बताया कि पांचवें प्रयास में उन्हें यह सफलता मिली। चार बार उन्होंने प्राथमिक परीक्षा पास की थी और इससे पहले एक बार साक्षात्कार तक पहुंचे थे। उनका विषय मनोविज्ञान था और उन्हें 574 रैंक मिला है।
नर्स की नौकरी मिलने के बाद पिता को देना चाहता था आराम
जोसफ ने पहली प्राथमिकता के तौर पर आईएएस, दूसरी आईपीएस, तीसरी आईएफएस और चौथी प्राथमिकता इंडियन ऑडिट एंड एकाउंट सर्विस को दी है। जोसफ का कहना है कि जनता के लिए सरकार की नीतियां बहुत ही अच्छी है लेकिन नीतियों का सही तरीके से जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जाता।
सरकारी कार्य करने के दौरान यह देखने और समझने का मौका मिला है और अब उस स्थिति में होउंगा जहां सरकार की नीतियों को सही तरीके से लागू करा पाउं। जोसफ ने बताया कि उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे लेकिन जब उन्हें एम्स में नर्स की नौकरी मिली थी तब ही उन्होंने पिता को मजदूरी करने से मना कर दिया था।
उनका कहना है कि पिता जी की मेहनत का ही नतीजा था कि मैं अपने आप को इस तरह से तैयार कर पाया। जोसफ की छोटी बहन भी नर्स हैं। जोसफ मूल रूप से केरल के कोच्चि के रहने वाले हैं।